मिलावटी सामानों की जांच रिपोर्ट 33 प्रतिशत  ही समय पर मिल पाती - Web India Live

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मिलावटी सामानों की जांच रिपोर्ट 33 प्रतिशत  ही समय पर मिल पाती


भोपाल। शहर में मिलावटी सामान बेचने वालों पर अंकुश लगाने के लिए सामान्य दिनों में खाद्य अधिकारी हर माह करीब ९६ खाद्य पदार्थो की जांच सैम्पल लेते है। जिसमें सर्विलांस की रिपोर्ट तो नहीं मिलने से मिलावटी सामान बेचने वालों पर पूरी तरह अंकुश नहीं लग पा रहा है। बजह यह है कि सर्विलांस रिपोर्ट की समय सीमा तय नहीं है,
जबकि लीगल रिपोर्ट १४ दिन में देना तय है लेकिन उसकी रिपोर्ट भी समय पर नहीं मिलती है। खाद्य एवं औषधि प्रशासन की प्रदेश स्तरीय फूड लेबोटरी ईदगाह हिल्स पर स्थित है यहां पिछले दो सालों टोमटो केचप, मावा, व्हिस्की, हल्दी, मिर्ची, आमूल्य मिल्क मेड, मूगफली आदि के २० हजार सैम्पल लिए गए थे। जिसमें भोपाल के ही १००० सैम्पलों की सर्विलांस रिपोर्ट अभी तक पेंडिंग पड़ी हुई है। अब इसकी जांच कराने के लिए प्राइवेट स्तर पर जबलपुर में फूड लेबोटरी से कराने की तैयारी चल रही है।
-९६ सैंपलों में हर माह ३० की रिपोर्ट ही समय पर
प्रदेश में करीब १५० खाद्य अधिकारी है, जबकि शहर में आठ खाद्य अधिकारी है, जिसमें प्रत्येक को माह में १२ जांच सैंम्पल लेना तो अनिवार्य है। इसमें आठ सर्विलांस संैपल और चार लीगल सैंपल लेना होता है। इस हिसाब से माह में ९६ सैम्पल लिए जाते हैं। इसमें देर सवेर लीगल सैपल की जांच तो मिल जाती है,लेकिन सर्विलांस सैपल की जांच रिपोर्ट नहीं मिलती है। इसका फायदा मिलावटी सामान बेचने वालों को मिल रहा है। बताया गया कि लीगल रिपोर्ट तो यहीं से मिलती है,लेकिन सर्विलांस रिपोर्ट के लिए जबलपुर की प्राइवेट लैब से करवाई जाती है।

-माइक्रो बायोलाजी लैब के खुलने से बढ़ सकता है स्टाफ
वर्तमान में पांच एनालिस्ट विशेषज्ञ होना चाहिए,लेकिन वर्तमान में यहां दो ही विशेषज्ञ जांच अधिकारी है। बताया गया कि तीन की कमी की पूर्ति के लिए उस सीट पर कर्मचारी तो बैठे है,लेकिन वह जांच नहीं करते है। विभाग के जिम्मेदारों से मिली जानकारी के अनुसार यहां माइक्रो बायोलाजी लैब बनाने की तैयारी चल रही है। जिसमें खराब होने वाले पदार्थो की जांच भी की जा सकेगी। इससे बनने से यहां फूड एनालिस्ट की भर्ती तो होगी ही साथ ही अन्य स्टाफ भी बढऩे की संभावना है।

-खुले मसाले व तेल प्रतिबंधित
बाजार में खुला खाने का तेल व मसाले खूब बिकते है। मसाले खुले में रखे होने से रंग और सुंगध दोनों खत्म हो जाती है। वहीं खुला खाने के तेल में मिलावट आसानी से हो जाती है। कार्रवाई के दौरान इसकी क्वालिटी की शर्तो नहीं होती है, जबकि पैकिंग के सामन में दुकानदार सभी शर्तो का पालन करता है। जिससे मिलावट की डर भी उसे रहता है। फूड विशेषज्ञों ने बताया कि फूड सेफ्टी एक्ट के तहत खुले मसाले व खाने का तेल भी नहीं बेचा जा रहा है। इसकी धरपकड़ और नहीं होने से छोटे व्यापारी सबसे अधिक खुला सामान ही बेच रहे है।
व्यापारियों के आरोप
मिलावटी सामान ज्यादातर फुटकर दुकानों व सड़क पर बैठने वाले ज्यादा रखते है,लेकिन उन पर खाद्य अधिकारी कार्रवाई नहीं करते है। क्योकि जांच रिपोर्ट अधिकारी की कार्रवाई पर निर्भर है और पकड़े जाने पर छोटे दुकानदारों पर ज्यादा पैनाल्टी नहीं लगना है। स्थाई दुकानदार व बड़े व्यापारी बदनामी के डर से मामले को दबाते है। वजह यह है कि जांच रिपोर्ट कब आएंगी और क्या आएगी इससे ज्यादा नुकसान नहीं जितना नुकसान जांच की बदनामी होता है।

-बदनामी और दबिश तक जांच सीमित
शहर की खाद्य पेय मिष्टान विक्रेता संघ के सचिव संजय अग्रवाल ने बताया कि त्योहारों के समय मावा व मिठाई की दुकानों पर खाद्य अधिकारी जांच तो खूब करने आते है, उसका प्रचार भी खूब किया जाता है,लेकिन शहर में अब तक नकली मावे की जांच में नकली मावा की रिपोर्ट नहीं दी गई है। इसका परिणाम यह हुआ कि बाजार में मावा के मिठाई का कारोबार आधा भी नहीं बचा है।
-सैम्पल कम हो वसूली ज्यादा
जुमेराती के एक किराना व्यापारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि फूल इंस्पेक्टर का यहां सभी दुकानों से महिना बंधा हुआ है। जो हर माह पैसा नहीं देता है, उसके यहां कई सामानों की जांच शुरू हो जाती है। बाजार में बैठा दुकानदार सामान के जांच में आने व मौके पर उसे नहीं बेच पान के भय से पैसा दे देता है।
सीधी बात-ब्रजेश सक्सेना, संयुक्त नियंत्रक, खादय एवं औषधि प्रसासन, मध्यप्रदेश
सवांददाता-शहर में मिलावटी खाद्य सामानों की भरमार है, उनके सैंपल भी लिए जाते है,लेकिन जांच रिपोर्ट समय पर नहीं मिलती है।
ब्रजेश सक्सेना-हमारे यहां साल में छह हजार जांच करने की छमता है,लेकिन रिपोर्ट इससे तीन गुना अधिक आदि है। इसकी मुख्य वजह स्टाफ की कमी भी है। जिसकी पूर्ति जल्द ही क्रमानुसार होगी।
संवाददाता-लीगल जांच तो १४ दिन में होती है, लेकिन सर्विलांस जांच रिपोर्ट की समय सीमा तय नहीं होने से हजारों मामले पेंडिंग हो चुके है।
ब्रजेश सक्सेना-सर्विलांस की जांच के लिए हमने टेंडर काल किया था, जिसमें सबसे कम में जबलपुर की प्राइवेट लैब आई है। जल्द ही सारी जांच वहीं से करवाई जाएंगी।
संवाददाता-सुना है, खाली पदों पर भर्ती होने के साथ ही यहां माइक्रो बायोलाजी लैब भी बन रही है।
ब्रजेश सक्सेना-आपने तो देखा ही होगा, माइक्रो बायोलाजी लैब बनाने का काम चल रहा है। पदों की स्वीकृति केबिनेट से मिल गई है,लेकिन लैब बनने के बाद बजट के हिसाब से क्रमानुसार सभी पद भरे जाएंगे। करीब 200 नए पद भरना है।


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