मिलावट का बाजार,खुल गई काम चलाऊ रंगों और एसेंस से जूस बनाने की दुकानें
भोपाल। पेय जूस बनाने के लिए सभी रंग पांच से 25 रुपए के पैकेट मिल जाता है। जिससे पचास लीटर जूस बन जाता है। इतना ही नहीं १२ रुपए की एसेंस की शीशी किसी भी सभी फ्लेवर में मिल जाएगी। सेक्रीन डालों और बन जाएगा मेंगों, पाइनेपल, रसबेरी, रोज, ब्लू बेरी जूस। इन दिनों बाजारों में सोडा वाटल, फ्लेवर जूस वाले खूब बेच रहे है। शहर की सबसे पुराने जुमेराती, जनकपुरी में कई दुकानों पर यह बिक रहा है। जब की यहीं बहुत से दुकानदार इसे रखने से भी बच रहे है। उनका कहना है कि गला खराब होने से लेकर स्वास्थ्य के लिए यह खुले व सस्ते रंग हानिकारण है,लेकिन कोई अन्य सामान के साथ हमारे से मांगते है तो पीछे हनुमानगंज से जनकपुरी की ओर लगी दुकानों से मंगाकर दे देते है। जब स्टिंग करने के लिए दुकानों पर पहुंचे तो जूस बनाने रंग व एसेंस तो फुटकर दुकानों पर मिल गया,लेकिन सेक्रीन जो की १४० रुपए किलो था। वह सामने की थोक दुकानों पर ४०० ग्राम के पैकेट में बिकते मिला।
दुकानदार व जूूस बनाने वाले से सीधी बात
संवाददाता-बाजार में फ्लेवर जूस की दुकान खोलना है। इतने सारे फ्लेवर और पांच रुपए में शिकंजी और दस रुपए में सोडे के साथ ग्लास बनाना मंहगा नहीं पड़ेगा।
जूस विक्रेता-तुम क्यों शकर और मंहगे कलर व एसेंस क्यो इस्तेमाल करोंगे। जुमेराती में ढेरों दुकानों पर पांच रुपए में रंग, १२ रुपए में किसी भी फ्लेवर का एसेंस और सेक्रीन मिल जाएगा। बस फर्फ मिलाओं एक टंकी बना लो। दस रुपए गिलास बेचना है तो सोडा मशीन से बनाओं और बेचों।
संवाददाता-जूस बनाने के लिए एसेंस व मेंगों कलर एक-एक शीशी चाहिए।
दुकानदार-१२ रुपए की एक शीशी आएगी। कौनसा कलर चाहिए। कलर की छोटी-छोटी डिब्बिया खुली हुई पांच-पांच रुपए की है। बड़ा पैकेट २५ रुपए में मिल जाएगा। यह आगे भी काम आएगा।
संवाददाता-सेक्रीन कितना लगेगा। कितने का पैकेट है।
दुकानदार-हम तो नहीं रखते है, लेकिन १४० रुपए किलो है। ४०० ग्राम के पैकेट में आता है। आप कहों तो मंगाकर दे देते है। वैसे सामने की थोक दुकानों पर मिल जाएगा। आप वहीं जाकर भी ले सकते है।
संवादाता-स्वास्थ्य के लिए हानिकारक तो नहीं होता है।
दुकानदार-आपकों घर के लिए चाहिए या दुकान व आयोजन के लिए? वैसे बेचने वाले खरीदने आते है। स्वास्थ्य के लाभ हानि के बारे में हमें नहीं पता। हम तो बेचते है।
इनका कहना
-बाजार में ठेलों पर बिकने वाले खुले जूस में सस्ते रंग, एसेंस व सेक्रीन है तो उससे गला तो खराब होता है, साथ ही ज्यादा पीने पर पेट की शिकायत भी होने लगती है। गर्मियों में वैसे ही खानपान की वस्तुएं जल्दी खराब होती है। पेय पदार्थो में बर्फ होने के कारण पहले पता नहीं चलता, बाद में गला खराब होने से आवाज लग जाती है।
-डॉ.आदर्श वाजपेयी, एमडी मेडिसीन
-दुकानों पर बिकने वाले पेय पदार्थो के सामानों की गर्मी के शुरू होते ही सेंपल की जांच करने टीम जाती है। कपंनी के पेय पदार्थो के सेंपल तो लेते है। वैसे छोटी-छोटे रुप में बिकने वाले फुटकर दुकानों पर भी जांच की जाएगी।
श्वेता पवार, संयुक्त कलेक्टर, खाद्य एवं औषधि
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