एमसीयू में हुई अनियमितता की जांच कराने के लिए दिग्विजय सिंह ने सीएम को लिखा पत्र - Web India Live

Breaking News

एमसीयू में हुई अनियमितता की जांच कराने के लिए दिग्विजय सिंह ने सीएम को लिखा पत्र


भोपाल। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय में हुई अनियमितता की जांच करवाने के लिए पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह ने आज सीएम कमलनाथ को पत्र लिखा हैं। दिग्विजय सिंह ने सीएम कमलनाथ से एमसीयू में हुई अनियमितता की जांच लोकायुक्त और ईओडब्ल्यू से कराने को कहा है। दिग्विजय सिंह कहा कि विश्वविद्यालय में भाई भतीजा वाद के तहत नियुक्ति की गई हैं। और नियमों का उल्लंघन हुआ है। इस लिए सरकार अनियमितताओं की जांच करवाए और जो भी दोषी हो उन पर कार्रवाई करें।

ई-मेल के साथ लिखित शिकायतों का लगा अंबार
जब से प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनीं है तब से माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं जनसंचार विवि में अनियमितताओं के कई मामले सामने आ चुके हैं। नियुक्तियों समेत विभिन्न मामलों की जांच तीन सदस्यीय समिति को सौपीं गई थी। समीति के पास ई-मेल के साथ लिखित शिकायतों का अंबार लग गया था। सबसे अधिक शिकायतें नियुक्तियों और बिशनखेड़ी में विवि नए परिसर को लेकर आई थी।
नियुक्तियों में विवि में सहायक प्राध्यापक प्रदीप डहेरिया और उनके भाई सत्येंद्र का नाम सामने आया है। दोनों के खिलाफ मार्च 2018 में तत्कालीन कुलपति से भी शिकायत हुई थी। आरोप है कि प्रदीप ने विवि में काम करते हुए यहीं से मास्टर्स किया। कोई व्यक्ति नियमित नौकरी करते हुए कक्षा में उपस्थित कैसे रह सकता है। प्रदीप परीक्षा विभाग को गोपनीय इंटरनल अंक भेजते थे। सत्येन्द्र ने भी कम्प्यूटर इंस्ट्रक्टर पद पर कार्य करते हुए अन्य संस्थान से नियमित मास्टर डिग्री प्राप्त की। उसी आधार पर पत्रकारिता विभाग में सहायक प्राध्यापक का पद प्राप्त किया है।


news 1
इनके लिए भी निकाले गलियारे
डॉ. सौरभ मालवीय को विवि में प्रकाशन अधिकारी बनाया गया था। बाद में ओएसडी और पीएचडी के बाद सहायक प्राध्यापक नियुक्त किया गया। आरोप है कि 08 अक्टूबर 2010 को तत्कालीन मुख्यमंत्री ने प्रकाशन अधिकारी पद पर नियुक्ति के लिए नोटशीट भेजी। उसी दिन सचिव, जनसंपर्क ने कुलपति को मार्क किया और कुलपति ने आदेश जारी करवा दिए। 08 अक्टूबर को विधिवत आदेश जारी कर पदभार ग्रहण कर लिया गया। केवल सूचनार्थ महापरिषद को भेजा गया।

आशीष जोशी को पहले इलेक्ट्रॉनिक मीडिया विभाग में प्रोफेसर बनाया गया था। जब उनकी योग्यता पर विवाद हुआ तो उन्हे ओएसडी बना दिया गया था। इसके बाद इन्हें डायरेक्टर प्रोडक्शन बनाया गया था। आरोप है कि इनके पास एक दिन का भी शिक्षण कार्य का अनुभव न होने पर भी इन्हें अक्टूबर 2010 से सीधे प्रोफेसर पद पर नियुक्ति दे दी गई थी। कुलपति ने एक सप्ताह बाद ही इलेक्ट्रॉनिक मीडिया विभाग के एचओडी का कार्यभार सौंप दिया था।


from Patrika : India's Leading Hindi News Portal https://ift.tt/2VAfn3e
via

No comments