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दिग्विजय सिंह ने मुख्यमंत्री को लिखा पत्र, कहा ईओडब्ल्यू, लोकायुक्त से कराओ पत्रकारिता विवि की जांच


माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं जनसंचार विवि में व्याप्त गड़बडिय़ों, 2004 के बाद से नियुक्तियों में की गई धांधलियों और अनियमितताओं को लेकर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने मुख्यमंत्री कमलनाथ को पत्र लिखा है। उन्होंने पूरे मामले में लोकायुक्त, ईओडब्ल्यू और विभागीय जांच कराने की मांग मुख्यमंत्री से की है।
उन्होंने अपने पत्र में आरोप लगाया कि 2004 के बाद बड़ी संख्या में शैक्षणिक, वित्तीय और प्रशासनिक अनियमितताएं की जाकर अधिनियम, परिनियम, अध्यादेशों और निर्देशों का गंभीर उल्लंघन किया गया है। उन्होंने कहा कि इस विवि में राज्य सरकार, विवि अनुदान आयोग, विवि अधिनियम, भर्ती नियम, आरक्षण नियम, रोस्टर, क्रय विक्रय नियम, यात्रा नियम, भंडार नियम, आचरण नियम आदि का लगातार दुरुपयोग कर घोर अनियमितताएं की गई हैं। उन्होंने प्रोफेसर्स की भर्ती, अधिकारियों की भर्ती और तृतीय और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की भर्ती में खुलकर भाई भतीजावाद, अनियमितता और भ्रष्टाचार का आरोप लगाया।
नोएडा परिसर, रीवा और दतिया केंद्र में जमीन खरीदी व भोपाल सेंटर के निर्माण में करोड़ों रुपए के गलत तरीके से भुगतान की बात उन्होंने कही है। भर्ती प्रक्रिया में सभी नियमों को ताक पर रखकर अपने लोगों को उपकृ त किया गया है। सबसे बड़ी बात राज्य के सभी विवि की आडिट लोकल फंड आडिट विभाग द्वारा की जा रही है, लेकिन इस विवि में आडिट जानबूझ कर शासकीय एजेंसी से नही हो रहा। बताया गया है कि विवि में कई वर्षों से लोकल फंड आडिट से ही आडिट कराने का प्रस्ताव है, लेकिन जानबूझ कर इसकी उपेक्षा की गई।
मैनिट डायरेक्टर की जमानत अर्जी पर नही हुई सुनवाई, तारीख बढ़ी
भोपाल।
मौलाना आजाद नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (मैनिट) के डायरेक्टर डॉ. नरें्रद सिंह रघुवंशी की एससी एसटी एक्ट के तहत जमानत के लिए हाईकोर्ट में लगाई गई अर्जी पर बुधवार को सुनवाई नही हो सकी। अब इस पर 13 मार्च को सुनवाई होगी। बता दें लगभग एक माह की मशक्कत के बाद बड़ी मुश्किल से सुनवाई के लिए 06 मार्च को उनका नंबर आया था, लेकिन फिर से इसकी तारीख बढ़ गई।
सूत्रों के अनुसार डायरेक्टर को जमानत मिलने में लगातार हो रही देरी के चलते इनकी मुसीबत और बढ़ सकती है। पुलिस इन्हें पकडऩे के लिए अब छापामार कार्रवाई कर सकती है। यही नही मैनिट में इनके संपर्क में रहने वाले लोगों को भी पूछताछ के लिए बुलाया जा सकता है। दरअसल एससीएसटी एक्ट के मामले में इन्हें जमानत नही मिली है। यहां की फैकल्टी लगातार इनके संपर्क में है। ऐसे में इसकी सूचना उन्हें पुलिस को दना चाहिए।


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