विचार मंथन : एक खूबसूरत सोच से नकारात्मकता का वातावरण भी तुरंत सकारात्मकता में बदल जाता है- सेन्ट पॉल
मात्र कुढ़ते रहने से, चिन्ता की चादर ओढ़कर निष्क्रिय हो जाने से और मन ही मन कुड़ बुड़ाते रहने से किसी को रत्ती भर लाभ न तो कभी हुआ है न कभी आगे होने वाला है । इसलिए ऐ परमेश्वर के प्यारे पुत्रों! जिन्दा ही मर जाने की बजाय तुम मरकर भी जीवित बने रहने की विद्या का अभ्यास करो । निष्क्रियता की घुटन का घेरा तोड़कर उत्फुल्ल क्रियाशीलता की खुली हवा में साँस लेना सीखों ।
रेशम का कीड़ा अपना कोया खुद बुनता है और फिर उसी में घुटकर मर जाता है । घुटन की छटपटाहट से उबरने के लिए वह भी शायद हमारी ही तरह कभी विधाता, कभी व्यवस्था और कभी पड़ौसी को कोसता होगा । हमारे मन रूपी कीड़े को भी अपने ही बनाये कोयों की कैद में बंधना-घुटन पड़ता है ।
‘कोयाबन्दी’ की निष्क्रियता के अँधेरे बंद तहखानों से निकलकर ऊपर आओ, ‘मानसिक कालकोठरी’ के वातायनों को सूर्य की ऊष्मा और स्वच्छ सुरभित पवन का स्वागत करने दो । तुम्हारे कुस्वास्थ्य का यही एक मात्र निदान है ।
जाओ और यही संदेश अपने संपर्क में आने वाले जन-जन तक पहुंचाओ ताकि जहाँ-जहाँ भी किसी प्रकार की बुराई हो उसे दूर करने में अपनी-अपनी सीमा और शक्ति भर वे सक्रिय सहयोग दे सकें । उनकी समस्त सामर्थ्य केवल हवा के साथ लड़ने में ही व्यर्थ न चली जाये । एक खूबसूरत सोच से नकारात्मकता का वातावरण भी तुरंत सकारात्मकता में परिवर्तन होता है ।
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