बाल कल्याण समिति के पदाधिकारियों की नियुक्ति पर उठे सवाल
भोपाल. भोपाल और रायसेन की बाल कल्याण समितियों के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति पर सवाल खड़े हो रहे हैं। भोपाल बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष व सदस्य पद की प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही कोर्ट की अवमानना का शिकार हो सकती है। हाल ही में रायसेन में भोपाल के दो सदस्यों को अतिरिक्त प्रभार देने के बाद भोपाल के दोनों पद और रायसेन में एक साल पहले हुई नियुक्तियों पर भी सवाल उठना शुरु हो गए। भोपाल में अध्यक्ष और एक सदस्य की नियुक्ति की जाना है,
लेकिन पूर्व अध्यक्ष ने शासन के खिलाफ कोर्ट में याचिका दायर कर रखी है। कोर्ट में मामला विचाराधीन होते हुए विज्ञापन जारी किया तो पूर्व अध्यक्ष ने अवमानना का आरोप लगाया है। वहीं, रायसेन में एक उम्मीदवार डॉ.़ एचबी सेन से तो अफसरों ने नियुक्ति देने से पहले यह तक लिखवा लिया है कि वह अध्यक्ष नहीं बनना चाहते हैं। उन्हें सदस्य बनाने पर कोई एतराज नहीं है, इसके बाद उन्हें सदस्य बना दिया गया और संदीप दुबे को अध्यक्ष नियुक्त किया गया। बताया जा रहा है कि संदीप दुबे, बाल संरक्षण अधिकार आयोग के अध्यक्ष राघवेंद्र शर्मा के रिश्तेदार है।
रायसेन में कोरम पूरा नहीं होने के कारण भोपाल बाल कल्याण समिति के सदस्य को रायसेन बाल कल्याण समिति का अतिरिक्त प्रभार दे दिया। जबकि कानून में इस तरह एक जिले के सदस्य को दूसरे जिले का प्रभार नहीं दिया जा सकता है। डा एचबी सेन ने पत्रिका को बताया कि जब मैंने अध्यक्ष के लिए आवेदन किया था तो मुझे कहा गया था कि आपने जिस पद के लिए आवेदन किया, यदि उस पर चयन नहीं होता है तो क्या करेंगे? इंटरव्यू टीम ने कहा कि आप लिखकर दे दो कि अध्यक्ष-सदस्य पद जो मिलेगा वह स्वीकार होगा, तो मैंने लिख कर दे दिया।
मैं तो चयन समिति का सदस्य हूं। मैंने किसी पर दबाव नहीं बनाया। समिति के अध्यक्ष ने दबाव बनाया हो तो पता नहीं। दुबे जी मेरे रिश्तेदार नहीं है इससे मैं इंकार नहीं कर रहा हूं। ब्राह्मण होने के नाते कोई न कोई नाता तो है।
राघवेंद्र शर्मा, अध्यक्ष, बाल संरक्षण अधिकार आयोग
बाल कल्याण समितियों के चयन में पारदर्शिता रखना आवश्यक है। सही उम्मीदवार चुनकर नहीं आ रहे हैं, इसलिए बच्चों का अहित हो रहा है। बाल कल्याण समितियां बहुत संवेदनशील हैं, बच्चों का मामला होने के कारण अध्यक्ष-सदस्यों के चयन में भी संवेदनशीलता बरती जाना चाहिए। भोपाल व रायसेन में विवाद की स्थिति बनीं हुई है जो कि व्यवस्था का मखौल उड़ा रही है।
प्रशांत दुबे, उम्मीदवार
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