पृथ्वी के निर्माण में सांप और कौवे का योगदान, जानिये क्या है गोंड कहानी
भोपाल। महुआ और गांजा एक दूसरे को बेइंतेहा प्यार करते हैं, लेकिन उनके माता पिता इस प्यार और शादी के खिलाफ हैं और उन दोनों को मारकर गांव के चौपाल पर गड़ा दिया जाता है लेकिन प्रेम के प्रतीक महुआ और गांजा बड़ा देव शिव पर अभी भी चढ़ाए जाते हैं..
शिव के ऊपर चढ़े महुआ और गांजा की कहानी कहती गोंड पेंटिंग के साथ ही आदिवासी समुदाय में प्रसिद्ध कथाओं को कहतीं पेंटिंग एग्जीबिशन का आयोजन किया गया एमपी नगर स्थित द हेडक्वाटर रेस्त्रां में।
धरोहर संस्थान की ओर से आयोजित इस दो दिवसीय गोंड पेंटिंग एग्जीबिशन के पहले दिन प्रसिद्ध गोंड आर्टिस्ट मनोज तेकमा ने अपने समुदाय के प्रचलित मिथकों पर बनी करीब 50 गोंड पेंटिंग को एग्जीबिट किया।
बड़ा देव ने सौंपी थी जिम्मेदारी
अलग अलग किस्से कहानियों को कैनवास पर रंगों के माध्यम से उकेरने वाले मनोज तेकाम की एक पेंटिंग में दर्शाया कि सांप के ऊपर कौवा चढ़ा है और आास पास केंचुआ और केकड़े बिखरे हुए हैं।
इसके पीछे की कहानी कहते हुए मनोज बताते हैं कि आदिवासी समुदाय में ऐसी धारणा है कि पृथ्वी का निर्माण करने का दायित्व शिव (बड़ा देव) ने कौआ को सौंपा और उससे मिट्टी की खोज कराई।
इस दौरान कौआ ने गलती से सांप के सिर पर पैर रखा और सांप की फुफकार से कौआ का रंग काला पड़ गया, वहीं केंचुए और केकड़े ने भी धरती को बनाने में मदद की।
पर्यावरण सुरक्षा और चिडिय़ा द्वारा बच्चों की सुरक्षा दर्शाती पेंटिंग
मनोज तेकाम की पेंटिंग में पर्यावरण सुरक्षा के साथ साथ आदिवासी देवी देवताओं को भी सुंदरता के साथ दर्शाया गया।
जहां उनकी कई पेंटिंग में पक्षियों और जानवरों की पूंछ से पेड़ को उगता हुआ दिखाया, वहीं आदिवासी समुदाय की चिडिय़ा द्वारा पैर ऊपर करके सोने की गाथा को चिडिय़ा के अंडों की सुरक्षा से जोड़ा गया।
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