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भोपाल रेलवे स्टेशन पर 40 लाख रुपए का आरओ प्लांट चार साल में महज दो सौ दिन ही चला

भोपाल. भोपाल स्टेशन पर दो साल से भी अधिक समय से बंद पड़ा 40 लाख रुपए का आरओ प्लांट रेलवे अधिकारियों के उस दावे की पोल खोल रहा है, जिसमें वे यात्रियों को शुद्ध पानी मुहैया कराने का कहते आ रहे हैं। आरओ प्लांट ठीक नहीं कराने को लेकर सवाल उठ रहे हैं कि कहीं मंडल के आला अफसर यात्रियों के बजाए पानी माफिया के हित में तो काम नहीं कर रहे। उधर, अधिकारियों की सफाई है कि प्लांट सही है, मरम्मत कर चलाया जाएगा। इसे चलाने के लिए अब एजेंसी नियुक्त की जाएगी।
गौरतलब है कि यह आरओ प्लांट वर्ष 2015 में लगाया गया था। अप्रेल 2017 से ये पूरी तरह से बंद है। इसके पहले भी ये कई बार बंद हुआ। इस तरह चार साल में यह प्लांट सिर्फ 200 दिन ही चल पाया। जानकारों का कहना है कि आरओ प्लांट को ठीक नहीं कराया जाना लापरवाही का मामला नहीं है। दरअसल, गर्मियों में भोपाल रेलवे स्टेशन पर बोतलबंद पानी की बिक्री के लिए पानी माफिया सक्रिय रहता है। रेलवे के ही आंकड़ों के अनुसार गर्मियों में प्रतिदिन 30 से 40 हजार बोतलबंद पानी बिक जाता है। ऐसे में यदि यात्रियों को रेलवे से ही आरओ वाटर भरपूर मिलने लगेगा तो पानी माफिया की बिक्री सीमित हो जाएगी। अफसरों की बिना मिलीभगत ऐसा संभव नहीं है।

देखें... रेलवे के अफसर कितने गंभीर
इस मामले में रेलवे की गंभीरता का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि आरओ प्लांट चलाने के लिए छह माह पहले टेंडर निकाला था। इसके बाद से रेलवे ने न तो टेंडर निकाला और न ही आरओ प्लांट को चलाने के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था की।


समझें पानी का गणित
167 यात्री गाडिय़ां रोजाना
01 लाख यात्री और उन्हें छोडऩे आने वालों का आवागमन प्रतिदिन
40 स्टॉल्स हैं, जहां बिक रहा बोतलबंद पानी


आरओ प्लांट सही है। इसके लिए एजेंसी की जरूरत है, जो इसे चलाए और मेंटेनेंस भी करे। अभी तक कोई एजेंसी नही मिली है। छह महीने पहले टेंडर जारी किया गया था, लेकिन उस समय केवल एक एजेंसी आई थी। इसका फिर से स्टीमेट बनवाया गया है।
आइए सिद्दीकी, जनसंपर्क अधिकारी, भोपाल रेल मंडल



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