सवाल, क्या आप कमलनाथ से दोस्ती निभा रहे हैं, तब शिवराज का जवाब... - Web India Live

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सवाल, क्या आप कमलनाथ से दोस्ती निभा रहे हैं, तब शिवराज का जवाब...

जिनेश जैन, भोपाल. चार महीने पहले प्रदेश की सत्ता से बाहर होने के बाद भी पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का सियासी अंदाज पहले जैसा ही दिखाई देता है। चुनावी दौरे में भीड़ से रूबरू होते हैं और उनकी समस्याओं को भी सुनते हैं। हर रोज चार से छह सभाएं ले रहे शिवराज के एजेंडे में मोदी को दोबारा प्रधानमंत्री बनाना और कमलनाथ सरकार को सबक सिखाना है।

हालांकि, शिवराज पर कमलनाथ के साथ दोस्ती निभाने के आरोप भी उन पर लग रहे हैं। इनमें कितना दम है, इस पर वे मुस्कुराए, फिर थोड़ा सा चेहरे पर भाव बदले और बोले... मैं कमलनाथ से ही नहीं, दुनिया के किसी भी व्यक्ति से निजी दुश्मनी नहीं रखता हूं, लेकिन कमलनाथ सरकार को चैन से नहीं चलने दूंगा। आप मेरे भाषणों को देख सकते हो... मैं लगातार सरकार पर हमला कर रहा हूं। उनकी कमियों और कुशासन को जनता के सामने ला रहा हूं।

भोपाल से उड़ान भरने के बाद दमोह लोकसभा क्षेत्र के केसली गांव में उतरते ही शिवराज हेलिपैड के आसपास जमा भीड़ से मामा शब्द सुनकर उत्साहित हो उठते हैं। वे चुनावी सभा के लिए कार में बैठते हुए कहते हैं, सत्ता से हटने के बाद जनता का प्रेम ज्यादा बढ़ा है।

इस आदिवासी बहुल गांव की सभा में वे बोलते हैं, कमलनाथ सरकार ने चार माह में ही विकास ठप कर दिया है। कर्जमाफी हुई नहीं, पैसे लेकर तबादले हो रहे हैं। बिजली गुल हो रही है। इससे तो अच्छा भाजपा का शासन था। फिर वे जनता से खुद के रिश्ते को जोड़ते हुए पूछते हैं, बताओ... मामा याद आते हैं या नहीं।

जवाब में भीड़ से आवाज आती है, मामा-मामा। शिवराज बताते हैं, भाजपा प्रदेश की सभी 29 सीटों पर जीत के लिए चुनाव लड़ रही है। अब तक मैं 125 विधानसभा क्षेत्रों में सभाएं कर चुका हूं। उनका दावा है, हमें जनता से दो बातों पर समर्थन मिल रहा है। पहला प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की लोकप्रियता और दूसरा कमलनाथ सरकार की चार महीने में ही ढेर सारी विफलता। कम समय में ही कमलनाथ सरकार से परेशान होकर प्रदेश त्राहि—त्राहि कर रहा है।

केसली से सिंग्रामपुर के सफर में हेलिकॉप्टर में शिवराज अपने साथ दमोह भाजपा प्रत्याशी प्रहलाद पटेल और पूर्व केंद्रीय मंत्री फग्गन सिंह कुलस्ते को भी बैठा लेते हैं। कुलस्ते मंडला से भाजपा प्रत्याशी हैं, जहां मतदान हो चुका है। वे कुलस्ते से पूछते हैं, आपके यहां की क्या रिपोर्ट है।

कुलस्ते कहते हैं, हमें दो विधानसभा क्षेत्र पर संशय है, बाकी छह क्षेत्रों में चुनाव ठीक रहा है। शिवराज बोले- मंडला से आप ही सीट निकालेंगे। इसी बीच, सिंग्रामपुर की पहाडिय़ों पर बने किले पर नजर पड़ते ही प्रहलाद पटेल बोल उठते हैं, यह अपराजित किला रहा है। शिवराज मुस्कराते हुए कहते हैं, आप भी चुनाव में अभेद्य रहेंगे। पटेल जवाब देते हैं, लड़ाई तो यही है। दमोह 1989 से भाजपा के कब्जे में है। पटेल यहां से सांसद भी हैं।

शिवराज दमोह लोकसभा क्षेत्र में लगातार तीन सभाएं करते हैं। पहले केसली, फिर सिंग्रामपुर और वहां से बंडा जाते समय हेलिकॉप्टर में लंच के दौरान उनसे सवालों का दौर जारी रहता है। मुख्यमंत्री कमलनाथ के पुत्र नकुलनाथ और गुना में ज्योतिरादित्य सिंधिया के सामने भाजपा ने कमजोर प्रत्याशी क्यों उतारे? शिवराज सफाई देते हैं, हमारे पास जो उम्मीदवार उपलब्ध थे, उनमें से ही बेहतर चयन किया।

 

उन्हें आप कमजोर नहीं कह सकते। बुंदेलखंड का मिजाज पूछा तो बोले, छह को दमोह, टीकमगढ़ और खजुराहो सीट पर चुनाव हैं। ये सीटें भाजपा के प्रभाव की है। हम इन पर मेहनत कर रहे हैं। कांग्रेस के लिए कोई संभावना नहीं छोडऩा चाहते हैं।

लगातार भाषण देने से शिवराज का गला बैठने लगता है। वे कहते हैं, गला सही रखने के लिए खान-पान का ध्यान जरूरी है। आमतौर पर हेलिकॉप्टर में घर से लाया हुआ भोजन ही करते हैं। तेरह साल तक प्रदेश की आइएएस लॉबी आपके साथ रही, फिर क्यों आपके खिलाफ हो गई? शिवराज कहते हैं, इसमें मुखालफत और आश्चर्य जैसी बात नहीं। आइएएस तो जिसकी सरकार है, उसके साथ रहेंगे। वे वहीं करेंगे, जो सरकार और मुख्यमंत्री चाहेंगे।

शिवराज से पूछा कि आप सरकार की स्थिरता पर सवाल खड़े करते हैं तो क्या भाजपा इस सरकार को गिराएगी? जवाब आता है, सरकार वेंटीलेटर पर है, जनता नाराज है और उनके समर्थक भी। यह तो अपने बोझ से ही गिर जाएगी। वापसी में भाजपा के प्रदेश प्रभारी विनय सहस्त्रबुद्धे से भाजपा की चुनावी स्थिति पर गुफ्तगू करते रहे। प्रदेश की 29 सीटों पर चार चरणों में हो रहे चुनाव में से छह पर मतदान हो चुका है। सात सीटों पर छह मई को वोटिंग होगी।

 



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