माता-पिता की चिंता थी बिना हाथ के मजदूरी कैसे करेगा, बेटे ने पाई JEE मेन्स में 889 वीं रैंक
अविकसित हाथ देखकर बिगड़ा पिता का मानसिक संतुलन सूरज नगर के सेवनिया गौंड में रहने वाले सुखराम संाकले मजदूरी करके परिवार की गाड़ी खींच रहे थे। शादी के बाद पहला बेटा पैदा हुआ तो सभी की उम्मीद जागी कि घर में कमाई के लिए दो हाथ और जुड़ गए लेकिन बेटे का दायां हाथ अविकसित देखते ही सुखराम तनाव में आ गए।
मानसिक संतुलन ऐसा गड़बड़ाया कि दो साल तक काम तक पर नहीं जा सके। चिंता इस बात की थी कि बिना एक हाथ के यह बेटा मेहनत-मजदूरी कैसे कर सकेगा? माँ अनिता ने हिम्मत नहीं हारी और बेटे का पास के सरकारी स्कूल में एडमिशन करा दिया। यहीं से पढ़ते हुए रमन ने 10 वीं पास की और आखिर में मॉडल हायर सेकेण्डरी स्कूल टीटी नगर में एडमिशन ले लिया।
एक सहारे ने दिए सपनों को पंख मॉडल स्कूल के प्रिंसपल एके रेनीवाल ने रमन के अंदर की आग को पहचाना, एक कार्यक्रम में स्कूल आए उद्योगपति विजय बोरा को रमन के बारे में बताया तो उन्होंने रमन की पूरी पढ़ाई का खर्चा उठाने की जिम्मेदारी अपने ऊपर ले ली। पढ़ाई के लिए कॉपी-किताबों से लेकर कोचिंग की फीस तक का इंतजाम विजय ने किया। इतना ही नहीं वे अपने खर्च पर रमन के लिए डेढ़ लाख रुपए कीमत का हाथ तक लगवा रहे हैं।
जेईई एडवांस की तैयारी में जुटे रमन को 12 वीं में 80 फीसदी से अधिक अंक आने का भरोसा है, साथ ही यह भी वह ठान चुका है कि आइआइटी में एडमिशन लेकर पढ़ाई पूरी करना है, और इसके बाद भी रुकना नहीं है, आईएएस बनकर ही दिखाना है।
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