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बच्चों के भविष्य के लिए कमलनाथ तोड़ेंगे अपना वचन

प्रदेश के सवा करोड़ बच्चों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री कमलनाथ अपना चुनावी वादा तोडऩे जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने स्कूल शिक्षा विभाग के अफसरों को निर्देश दिए हैं कि सभी सरकारी स्कूलों में ई-अटेंडेंस सिस्टम को फिर से लागू किया जाए। कांग्रेस ने वचन-पत्र में ई-अटेंडेंस बंद करने का वचन दिया था।
दरअसल, हाल ही में स्कूल शिक्षा विभाग की बैठक में सरकारी स्कूलों में स्तरहीन पढाई को लेकर कमलनाथ ने नाराजगी जाहिर की थी। इसी दौरान यह बात भी सामने आई कि ग्रामीण क्षेत्र के स्कूलों में शिक्षक रोजाना नहीं जाते है। अधिकांश शिक्षक स्कूल में देरी से पहुंच रहे हैं। इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि हमने वचन पत्र में शिक्षकों की ई-अटेंडेंस सिस्टम को लागू नहीं करने वादा किया था, लेकिन स्क्ूल शिक्षा के हालात को देखते हुए ऐसा करना संभव नहीं है।

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मुख्यमंत्री ने अफसरों से यह भी कहा कि मुझे अपने वचन को तोडऩा मंजूर है, लेकिन शिक्षकों की सुविधा के लिए बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि जो शिक्षक अच्छा रिजल्ट देंगे, उन्हें राज्य स्तर पर पुरस्कृत भी किया जाएगा। जो परफार्म नहीं कर पा रहे हैं, उन्हें बाहर का रास्ता दिखाया जाएगा।

मोबाइल से लगेगी हाजिरी
स्कूल शिक्षा विभाग में ई-अटेंडेंस एम-शिक्षा मित्र एप बना हुआ है। इसमें पंच इन और आउट कर उपस्थिति दर्ज कराने की व्यवस्था है। मोबाइल फोन को जीपीएस लोकेशन ऑन रखना होगा। अटेंडेंस के अलावा शिक्षक इस एप से आकस्मिक अवकाश, चिकित्सा अवकाश, विशेष व एच्छिक अवकाश के लिए भी आवेदन कर सकेंगे। इसके अलावा शिक्षक एप के जरिए अवकाश की सूचना, स्कॉलरशिप की जानकारी, स्कूलों की गतिविधियों के साथ स्कूल को मिलने वाली ग्रांट जीपीएफ व पे-स्लिप भी देख सकते हैं।

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शिक्षकों के विरोध पर बंद हुआ था ये सिस्टम
तत्कालीन भाजपा सरकार ने 2018 में ई-अटेंडेंस सिस्टम लागू किया था। इस पर शिक्षकों ने प्रदेश भर में आंदोलन कर विरोध दर्ज कराया था। विधानसभा चुनाव को देखते हुए इसके अमल में ढील दी गई थी। शिक्षकों के विरोध के चलते कांग्रेस ने वचन पत्र में ई-अटेंडेंस सिस्टम को बंद करने का वादा किया था।

अब होगी एजुकेशन-कैबिनेट
मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कैबिनेट की बैठक में कहा कि प्रदेश में शिक्षा की हालत सुधारने की जरूरत है। सीएम ने कहा कि एक कैबिनेट शिक्षा पर भी की जाए। इसमें शिक्षा सुधार के सुझाव व प्रस्ताव आ सकेंगे। उन्होंने कहा कि गुजरात में एक कंपनी को मेनपॉवर की जरूरत थी, तो कुछ लोगों को भेजा। लेकिन, कंपनी ने कहा कि ये लोग ठीक से रिज्युम नहीं बना पाते। सच भी है, लोग नक्शा ठीक से देख नहीं पाते, फिर इंजीनियर कैसे बन गए।

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आयोग्य शिक्षकों की होगी छुट्टी
प्रदेश के 70 सरकारी शिक्षक दोबारा परीक्षा देने के बावजूद पास नहीं हो पाए। ये 14 अक्टूबर को हुई शिक्षक संवर्धन परीक्षा में बैठे थे। सभी ने किताब रखकर परीक्षा दी थी। इसके बावजूद ये सवा तीन घंटे के पेपर में 50 फीसदी अंक भी नहीं ला सके। फिलहाल लोक शिक्षण संचालनालय ने इनकी उत्तर पुस्तिकाएं जांच के लिए मंगा ली हैं। जांच के बाद इनके खिलाफ अनिवार्य सेवानिवृत्ति की कार्रवाई हो सकती है।



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