पलायन 2.0: एक साल बाद फिर दिखने लगी वही तस्वीरें
भोपाल. जिसे जो साधन मिल रहा है, वो उससे लौट रहा है। बस, ट्रेन, ऑटो, ट्रक। प्रदेश में लौटने पर गांव के लिए वाहन नहीं मिलने पर पैदल ही कूच कर रहे हैं। पिछले साल की तरह इस बार फिर इस बार फिर मजदूरों-श्रमिकों के पलायन की तस्वीरें सामने आने लगी हैं। महाराष्ट्र, दिल्ली, गुजरात जैसे राज्यों से मजदूर मध्यप्रदेश, यूपी, बिहार लौट रहे हैं। उनका कहना है कि वे दोबारा कष्ट सहन नहीं करना चाहते। राज्यों में बंदिशें बढ़ रही हैं। सब बंद हो रहा है। काम नहीं मिला तो परविवार को कैसे पालेंगे। क्या खाएंगे। घर का किराा कैसे देंगे। यही वजह है कि कई ट्रेनें-बर्से खचाखच चल रही हैं।
पंचायतों ने शुरू की पुनर्वास की तैयारी
सतना: प्रशासन ने पंचायत स्तर पर स्क्रीनिंग, क्वॉरंटीन व रोजगार की व्यवस्था के निर्देश दिए हैं। शुक्रवार तक जिले में 185 श्रमिक अन्य राज्यों से लौटकर आए हैं।
बीना: आरक्षित ट्रेनों में टिकट नहीं मिलने पर लोग बे-टिकट लौट रहे हैं। मुंबई से लौट रहे राजवीर ने बताया कि पैदन ना चलने पड़े इसलिये अभी से लौट रहे हैं।
पन्ना: मुंबई और नागपुर सहित अन्य महानगरों व राज्यों से औसतन 200 से 300 लोग जिले में लौट रहे हैं।
झाबुआः प्यारे सिंह बंगड़िया और पत्नी रमतू बच्चों के साथ भीलवाड़ा से निकले। गृहस्ती का सामान पोटलियों में भरकर रतलाम की बस में बैठ गए।
रीवाः रविवार को पुलिस ने कार्रवाई करते हुए दो ओवरलोड बसें पकड़ी हैं। दोनों में मजदूर थे। गर्मी में बच्चों का बुरा हाल था। सभी परेशान हो रहे थे।
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