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लापता हो प्यारे मियां दुष्कर्म कांड की चारों पीड़िताएं

भोपाल. प्यारे मियां दुष्कर्म कांड की पीडि़ताएं एक महीने से गायब हैं। पीडि़ताओं की कस्टडी लेने वाले जिन परिजनों पर उनकी देखभाल की जिम्मेदारी है, उनका भी कहीं पता नहीं है। यह बात बाल कल्याण समिति का रिकार्ड कह रहा है। गौरतलब है कि समिति ने चारों पीडि़ताओं के परिजनों को प्रत्येक माह की पहली तारीख को समिति के समक्ष उपस्थित होकर पीडि़ताओं की सुरक्षा, अन्य स्थितियों की जानकारी देने के निर्देश दिए हैं। अप्रेल का एक सप्ताह बीत जाने के बाद भी परिजन या पीडि़ता समिति के समक्ष पेश नहीं हुई। ऐसे में समिति परिजनों के खिलाफ नोटिस जारी करने की तैयारी कर रही है।

बता दें, प्यारे मियां दुष्कर्म कांड में पांच पीडि़ताएं प्रमुख गवाह थीं। इनको नेहरू नगर स्थित बालिका गृह में रखा गया था, जहां से वे परिजनों के पास जाने की जिद कर रही थीं। इसी खींचतान के बीच दो पीडि़ताओं ने जहरीला पदार्थ खा लिया था, जिससे एक पीडि़ता की मौत हो गई थी। फरवरी के आखिरी सप्ताह में बाल कल्याण समिति ने शेष चारों पीडि़ताओं को उनके परिजनों को सौंपा था। साथ ही निर्देश दिए थे कि उनकी देखभाल और पढ़ाई की व्यवस्था करनी है और प्रतिमाह एक तारीख या पहले कार्यदिवस में समिति के कार्यालय में उपस्थित होकर सुरक्षा और देखभाल की सूचना देनी है, लेकिन परिजन समिति के इस निर्देश का पालन नहीं कर रहे हैं। ऐसे में संवेदनशील मामले में पीडि़त और प्रमुख गवाह किशोरियों की वास्तविक स्थिति का पता प्रशासन को नहीं चल पा रहा है।

एक सप्ताह बाद भी अता-पता नहीं
बाल कल्याण समिति के सदस्य राजीव जैन ने बताया कि पिछले माह भी नहीं आई थी तीन पीडि़ताएं पिछले महीने आई थी एक पीडि़ता मार्च में एक तारीख को चार में से केवल एक पीडि़ता के परिजन बाल कल्याण समिति पहुंचे थे। समिति के अध्यक्ष कृपाशंकर चौबे ने किशोरी की मां से पूछा कि आपने बेटी का एडमिशन किसी स्कूल में क्यों नहीं कराया। इस पर वह कोई जवाब नहीं दे सकी थी। पीडि़ताओं और उनके परिजनों ने कार्यालय में उपस्थिति नहीं दी है। यह समिति के आदेश के उल्लंघन का गंभीर मसला है। हम पीडि़ताओं के परिजनों को नोटिस जारी करने जा रहे हैं।



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