दो टै्रक्टर बेचे, पेट दर्द का 15 साल कराया इलाज, जबकि बीमारी थी दिमाग में
भोपाल. बाबई के किसान लखन सिंह पटेल 15 साल से गैस, अपच और पेट में जलन से पीडि़त हैं। भोजन के बाद सीने में जलन इतनी कि खाना-पीना छूट गया। भोपाल, नागपुर और मुंबई में हुई जांचों में सब सामान्य निकला। इलाज में दोनों ट्रैक्टर बेचे, फिर भी आराम नहीं मिला तो लखन सिंह मानसिक रोग विशेषज्ञ के पास गए। तीन महीने के इलाज के बाद दिक्कत पूरी तरह खत्म हो गई।
दरअसल, लखन की बीमारी पेट में नहीं बल्कि दिमाग में थी। दिमाग उसे बार-बार सिर्फ यह आभास करा रहा था कि उसके पेट में जलन हो रही। मेडिकल के शब्दों में इसे सोमेटोफार्म डिसऑर्डर कहते हैं। यह ऐसा मनोविकार है, जिसमें तनाव या डिप्रेशन शारीरिक लक्षण या शरीर के किसी हिस्से में दर्द रूप में भी मिलते हैं। कोरोना काल में संक्रमण का डर, नौकरी छूटने के तनाव से सोमेटोफार्म डिसऑर्डर के मरीजों की संख्या भी बढऩे लगी है।
दिमाग देता है संकेत
लखन की काउंसिलिंग में पता चला कि उसके परिवार में कई समस्याएं थीं, जिसे वो हल नहीं कर पा रहा था। यही तनाव उसके दिमाग में बैठ गया। कई बार जान देने के विचार भी आए, लेकिन दिमाग ने उसे बचाने के लिए पेट में दर्द जैसे लक्षण देना शुरू कर दिया। लखन खुद को नुकसान पहुंचने की बजाय पेट के बारे सोचने लगा। इसे फिजिकल सिम्टम्स ऑफ एंजायटी भी कहा जाता है।
यह एक प्रकार का पेन डिसऑर्डर है, जिसमें रोगी के शरीर के किसी हिस्से में दर्द बना रहता है। यह दर्द जोड़, पेट, माहवारी, हाथ-पैरों, सिर, किसी सर्जरी व चोट का दर्द होता है जो दवाओं से ठीक नहीं होता है। अन्य लक्षणों में गहरी सांस लेना व रुकावट आना, दम घुटना, पेट दर्द, बार बार शौच जाना, खट्टी डकारें आना, मिर्गी जैसे दौरे पडऩा, बार-बार लकवे होना, अचानक हाथ पैरों में कमजोरी या ठंडे होना आदि हो सकता है। ऐसे लक्षण में एक बार मनोचिकित्सक के पास जाकर परामर्श करना चाहिए।
इलाज के बाद आराम ना मिले तो कराएं काउंसिलिंग
विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसा नहीं है कि हर दर्द मानसिक विकार ही हो। दर्द होने पर सबसे पहले संबंधित डॉक्टर को ही दिखाना चाहिए। लेकिन सभी रिपोर्ट नॉर्मल हो, लगातार और लंबे उपचार के बाद भी आराम ना मिले तो मानसिक रोग विशेषज्ञ से सलाह जरूर लेनी चाहिए।
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