जानलेवा टर्न पर नहीं लगी स्पीड पर लगाम तो होते रहेंगे हादसे
भोपाल. बीआरटीएस कॉरिडोर में आए दिन होने वाले हादसों को रोकना है तो अब जगह-जगह बने कट पाइंट पर सबसे पहले स्पीड ब्रेकर बनाने की जरूरत है। यह कॉरिडोर आवासीय और व्यवसायिक क्षेत्रों से घिर गया है, इसके दोनों ओर सैंकड़ों कॉलोनियां विकसित हो गई हैं। ट्रैफिक का दबाव बढ़ गया है, इससे इस कॉरिडोर में कट पाइंट पर वाहनों की गति को नियंत्रित रखना बेहद जरूरी हो गया है। मिक्सलेन में तो कोई स्पीड ब्रेकर अब तक नहीं लगाया गया, इसमें प्रवेश के पाइंट्स पर जरूर ब्रेकर लगाए गए थे, लेकिन समय के साथ इन ब्रेकर से ऊंची आसपास की रोड हो गई, जिससे इनका भी औचित्य खत्म हो गया। ज्ञात हो कि शनिवार रात तेज रफ्तार कार के ट्रक में टकराने से कार सवार चार युवकों की मौत हो गई, वहीं एक गंभीर रूप से घायल है।
कड़े कदम उठाएं: भूपेंद्र सिंह
बीआरटीएस लेन में होने वाले हादसों को रोकने के लिए नगरीय विकास एवं आवास मंत्री भूपेन्द्र सिंह ने कड़े कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। यह निर्देश उन्होंने सोमवार को समीक्षा बैठक में दिए। कहा, प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में लोक परिवहन कितना आवश्यक है, इसका सर्वे किया जाएगा। सर्वे रिपोर्ट के आधार पर लोक परिवहन का खाका तैयार किया जाएगा। शहरों के अंदर और शहरों के बीच बसों का संचालन करने वाली कंपनियों की स्थिति की समीक्षा करें। उन्होंने नगरों में बनाए गए बस स्टैंड की जरूरी सेवाओं की योजना बनाने के निर्देश दिए। कहा, पब्लिक ट्रांसपोर्ट नागरिकों के लिए कितना फायदेमंद है, इसकी रिपोर्ट तैयार करें। प्रमुख सचिव नगरीय विकास एवं आवास मनीष सिंह ने कहा कि कांप्रेहेंसिव मोबाइलिटी टेस्ट कराने की जरूरत है।
लेजर गन रोकेगी रफ्तार
प्रदेश में तेज गति से वाहन चलाने वालों पर पुलिस स्पीड लेजर गन से निगरानी करेगी। स्पीड लेजर गन से 100 मीटर तक की दूरी से वाहन की गति, प्रकार और नंबर पता किया जा सकेगा। तेज वाहन चलाने वालों के विरुद्ध कार्रवाई के लिए सबूत के तौर पर भी लेजर गन का सहारा लिया जाएगा। यह जानकारी अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (पीटीआरआई) डीसी सागर ने स्पीड लेजर गन के उपयोग की वर्चुअल ट्रेनिंग सत्र को संबोधित करते हुए पुलिस अधिकारियों को दी। ट्रेनिंग का समापन मंगलवार को होगा। सागर ने कहा कि सड़क दुर्घटना की रोकथाम के लिए तेज गति से वाहन चलाने वालों की आदतों में सुधार लाना जरूरी है। इस दौरान स्पीड लेजर गन के क्रियान्वयन और उपयोगिता की जानकारी विशेषज्ञों ने दी।
तेज गति वाहन से खतरा
राहुल मीणा श्रीराम कॉलोनी की ओर बाइक से आने के लिए दूसरी ओर देर तक अटके रहे। 30 मीटर चौड़ी रोड पार करने में सर्विस रोड, डेडिकेटेड लेन और मिक्सलेन पार की। वह कहते हैं कि वह रोज ऐसे ही तेज रफ्तार वाहनों के बीच बचते हुए ही निकलते हैं। वे कहते हैं कि चौराहों पर स्पीड ब्रेकर लगना चाहिए, ताकि यहां वाहनों की गति कम हो जाए और दुर्घटना की आशंका न बने।
15 मिनट इंतजार किया
मिसरोद के पास जगदीश वर्मा अपने परिवार को लेकर सड़क पार करने के लिए खड़े हैं। तेज रफ्तार गाडिय़ां रूक ही नहीं रहीं। करीब 15 मिनट इंतजार करना पड़ा। जगदीश कहते हैं कि कई बार पता ही नहीं रहता कि गाड़ी आ रही। सर्विस रोड तो पार हो जाती है, लेकिन मिक्सलेन और डेडिकेटेड लेन को पार करने में बेहद खतरा है। गाडिय़ां रूकती ही नहीं, इसलिए स्पीड ब्रेकर जरूरी है।
वाहनों को रोकना पड़ा
बाग सेवनियां स्टॉप के पास पैदल चलकर निकलने वालों के लिए बने पाइंट पर हरिचरण ठाकुर समेत अन्य लोगों को मिक्सलेन पार करने करीब दस मिनट तक वाहनों की संख्या कम होने का इंतजार करना पड़ा। उन्हें होशंगाबाद से आई बस में बैठना था, लेकिन वे उस तक पहुंच नहीं पा रहे थे। उनके परिजन बस से उतरे और वाहनों को रोककर उन्हें बुलाया।
खड़े किए वार्डन
दुर्घटना के बाद सोमवार को मिसरोद से आरआरएल डेडिकेटेड लेन में प्रवेश-निकासी पाइंट पर ट्रैफिक वार्डन थे। सुपरविजन भी बढ़ाया गया। सुपरवाइजर खुद यहां अपने वाहनों के साथ खड़े हुए दिखे।
उलझता है ट्रैफिक
मिक्सलेन में बिना ब्रेकर तेज रफ्तार वाहन चौराहों पर सबसे अधिक दुर्घटना की आशंका बना रहे हैं। पूरे कॉरीडोर के चौराहों पर ट्रैफिक कंट्रोल सिस्टम नहीं है। एक साथ अलग-अलग लेन से वाहन एक दूसरे की लेन में घुसते हैं और यही बड़ी दिक्कत बना रहा है।
ये हैं दावे
बीआरटीएस बस स्टॉप के पास बनाए गए पैदल निकासी पाइंट ऑटोमैटिक सिग्रलिंग सिस्टम युक्त रहेंगे। यहां बटन रहेगा, जिसे दबाने पर कुछ ही देर में रेड सिग्नल होगा और वाहनों को रूकना पड़ेगा, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया।
कॉरीडोर पार करने मिक्सलेन में वाहनों की गति नियंत्रित करने का दावा किया था। इसके लिए स्पीड ब्रेकर के साथ गति सीमा भी तय की थी, लेकिन फिलहाल ऐसा कुछ नजर नहीं आ रहा।
सर्विस रोड से लेकर मिक्सलेन में सड़क पर गहरे और बड़े गड्ढे बन गए हैं, जबकि रोड को पूरी तरह से गड्ढा मुक्त व निर्बाध आवाजाही को ध्यान में रखकर बनाना तय हुआ था, लेकिन ऐसा नहीं हो पा रहा है।
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