औद्योगिक क्षेत्रों के चार किमी दायरे में बसाए जाएंगे कामगार
भोपाल। सरकार अब उद्योगों के चार किलोमीटर के दायरे में कामगार बस्ती विकसित करने की तैयारी कर रही है। इसका मकसद यही है कि उद्योगों के करीब कामगार रहेंगे तो उनकी आने जाने में समय की बचत होगी, वहीं उद्योगों की उत्पाद क्षमता में भी इजाफा होगा। इस दिशा में सरकार ने काम शुरू किया है। खाका तैयार होने के इसे मूर्त रूप दिया जाएगा।
कोरोना की पहली लहर में सबसे ज्यादा नुकसान उद्योगों को हुआ। इसका प्रमुख कारण श्रमिकों को पलायन होना रहा। दूसरी लहर के पहले उद्योग एलर्ट हो गए थे। इसका परिणाम यह हुआ कि पलायन कम हुआ। उद्योगों ने कामगारों, श्रमिकों के लिए रहने और खाने की पर्याप्त व्यवस्था की थी। साथ ही भरोसा दिलाया था कि उद्योगों का उत्पादन भले ही कम हो, लेकिन उनका वेतन कम नहीं होगा। इसका असर यह हुआ कि कामगार यहीं जमे रहे। अब सरकार का प्रयास है कि कामगरों को उद्योगों के समीप ही बसाया जाए। जिससे वे औद्योगिक इकाइयों के संपर्क में रहें। सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री ओमप्रकाश सखलेचा का कहना है कि कामगार बस्तियां औद्योगिक क्षेत्रों के चार किलोमीटर के दायरे में बसाए जाने का प्रयास है। इस दिशा में काम हो रहा है।
सबसिडी पॉलिसी रिव्यु पर मंथन -
सरकार सबसिडी पॉलिसी को रिव्यु करने पर विचार कर रही है। साथ ही ब्याज दरों को कम से कम रखने पर भी विचार हो रहा है। 5 उद्यमियों के क्लस्टर को भी अब आसानी से जमीन मिल सकेगी। अविकसित जमीन पर क्लस्टर में इंडस्ट्री स्थापित करने के लिए कलेक्टर गाइडलाइन के 25 प्रतिशत मूल्य पर जमीन मिलेगी। यदि ऑनलाइन टेंडर के माध्यम से यदि कोई निवेशक नहीं आता तो पहले आओ, पहले पाओ योजना के तहत जमीन अलॉट की जाएगी।
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