शिक्षाविद बोले- दो साल पुराने अंकों से नहीं हो पाएगा विद्यार्थियों का सटीक मूल्यांकन
भोपाल. एमपी बोर्ड की ओर से 10वीं का रिजल्ट जारी करने के बाद 12वीं का रिजल्ट बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। शिक्षाविदों का कहना है कि रिजल्ट तैयार करने के लिए बोर्ड जो प्रक्रिया अपना रहा है, उससे विद्यार्थियों की योग्यता का सही मूल्यांकन नहीं हो पाएगा, वहीं दो साल पुराने 10वीं के ही रिजल्ट को मूल्यांकन का आधार बनाना ठीक नहीं है। इसकी अपेक्षा सीबीएसइ का फॉर्मूला कहीं अधिक संतुलित है।
यह है सीबीएसइ का फॉर्मूला
सीबीएसई ने 12 बोर्ड का रिजल्ट जारी करने के लिए विद्यार्थी 10वीं कक्षा के अंकों में से 30 प्रतिशत, 11वीं के अंकों से 30 प्रतिशत और 12वीं के इंटरनल के सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के 40 प्रतिशत अंक लेकर उन्हें जोड़कर अंतिम रिजल्ट तैयार करने के निर्देश दिए हैं। 10वीं और 11वीं के रिजल्ट सहित 12 के आंतरिकत मूल्यांकन के अंक मांगे हैं।
यह है एमपी बोर्ड का फॉर्मूला
एमपी बोर्ड ने तय किया है कि विद्यार्थी के 10वीं बोर्ड के छह विषयों में जिन पांच विषयों में सर्वश्रेष्ठ अंक होंगे उन्हें लेकर पांच विषयों के अंक दिए जाएंगे। 10 वीं बोर्ड का रिजल्ट विश्वसनीय होने के आधार पर इसे अपनाया गया है।
यह बच्चों के साथ अन्याय होगा
10 वीं के बाद दो सालों में अधिकतर बच्चों का प्रदर्शन सुधरता है। वह न केवल करियर के प्रति जागरुक होते है बल्कि अपनी पंसद के चयनित विषय पढऩे के कारण भी बेहतर प्रदर्शन करते हैं। दो सालों में बच्चे की पढ़ाई बेहद आगे बढ़ जाती है, बोर्ड की ओर से जिस तरह से सिर्फ 10वीं के अंक लिए जा रहे हैं, उससे सभी बच्चों के साथ न्याय नहीं हो सकेगा।
डॉ. एसएन राय, शिक्षाविद्
कम होगी एमपी बोर्ड की मार्क शीट की मान्यता
बच्चे 10 वीं तक पूरे विषय पढ़ते हैं, जबकि 11 वीं से पढ़ाई स्टीम आधारित हो जाती है, ऐसे में 10 वीं के पांच विषयों को बेस्ट ऑफ फाइव की तर्ज पर कैसे उठाया जा सकता है। ऐसी मार्कशीट को कौन मान्य करेगा।
दामोदर जैन, शिक्षाविद्
यदि फार्मूला नहीं बदल सकते तो 10 फीसदी अंक बढ़ाएं
कक्षा 12 वीं के रिजल्ट तैयार करने के लिए एमपी बोर्ड का जो फार्मूला है वह मेरी समझ से पूरी तरह गलत है, यह बच्चों के साथ अन्याय होगा, क्योंकि इसमें 10 वीं के नम्बर ही 12 वीं में दिए जाएंगे, इस बीच यदि बच्चे ने अपनी पसंद का विषय साइंस, कामर्स या एग्रीकल्चर ले लिया तो उसके अंक 10वीं में कहां मिलेंगे, ऐसे में दो साल पुराने अंकों से मैरिट कैसे बनेगी। इसमें कई विद्यार्थियों के अंक कम हो रहे हैं। बोर्ड को सीबीएसइ का फार्मूला अपनाना था, यदि यही रखना है तो उसे कम से कम 10 फीसदी नम्बर बढ़ाने चाहिए।
अजीत सिंह, प्रदेशाध्यक्ष, प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन
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