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शिवराज बोले- औषधीय खेती को मिलेगा बढ़ावा, सरकार ही खरीद लेगी उत्पाद

jitendra.chourasiya@भोपाल। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि हमारे भारतीय योग और आयुर्वेद अमूल्य निधि है। कोरोना काल में दुनिया ने योग का महत्व जाना। वहीं हमारे वैद्य के पास प्राचीन विधि-औषधी है, लेकिन यह धीरे-धीरे विलुप्त हो रही हैं। ये विद्या पीढ़ी दर पीढ़ी मिलना चाहिए। इस पर ध्यान देना होगा। प्रदेश में औषधीय खेती को बढ़ावा दिया जाए। सरकार उनसे मिनिमम सपोर्ट प्राइज पर औषधीय उत्पाद खरीदेगी। इसके लिए प्लान कर लेंगे। आयुर्वेद और पर्यटन को भी जोडक़र लाने पर विचार करना होगा।
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यह बात शिवराज ने सोमवार को आयुष की संभावनाओं को लेकर आयुष से जुड़े उद्योगपतियों व विशेषज्ञों से वचुर्अल संवाद में कही। यहां शिवराज ने कहा कि मध्यप्रदेश में 31 फीसदी वन क्षेत्र है, जो दुर्लभ औषधियों से भरा है। केमिकल से जो औषधियां बन रही हैं उससे नुकसान को हम जानते हैं, इसलिए आयुर्वेद की तरफ दुनिया जा रही है। हमें अपनी प्राचीन विधाओं को लेकर गंभीर होने की जरूरत है।
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नया रोडमैप ऐसा बनेगा-
शिवराज ने कहा कि हम जनजाति समाज को जोडकर औषधियों को उगाएंगे। इसके लिए हम ग्राम सभाों को अधिकार देने पर सोच रहे हैं। जलवायु के हिसाब से तय करेंगे कि कहां क्या बेहतर है। पौधों की आपूर्ति और प्रबंधन के लिए निजी संस्थाओं से अनुबंध भी कर सकते हैं। एफपीओ का निर्माण कर सकते हैं। हमें औषधीय उत्पादों के संग्रहण, पैकेजिंग, भंडारण की हमें चेन बनानी पडेेगी। औषधियों के उत्पादन से वेलनेस टूरिज्म को भी बढ़ावा मिलेगा। रोजगार भी बढ़ेगा। इसके लिए हम जल्द टॉस्क फोर्स का गठन करेंगे।
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मध्यप्रदेश की आयुष-शक्ति-
- 1752 आयुष डिस्पेंसरी
- 23 आयुष हॉस्पिटल
- 36 आयुष एलोपैथी हॉस्पिटल
- 21 फीसदी ट्राइबल जनसंख्या
- 89 ट्राइबल ब्लॉक प्रदेश में
- 31 फीसदी वन क्षेत्र प्रदेश में
- 10 नेशनल पार्क, 23 वाइल्ड लाइफ सेंचुरी
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मध्यप्रदेश बनेगा ट्रेडिशनल मेडीसिन का सेंटर-
शिवराज ने कहा कि ग्लोबल सेंटर फॉर ट्रडिशनल मेडीसिन का सेंटर भी मध्यप्रदेश में बने इसके प्रयास होंगे। हमने एक जिला-एक उत्पाद की हमने योजना बनाई है। 20-25 साल पहले मध्यप्रदेश में आवंला व्यापक स्तर पर उगाया जाता था, फिर उत्पाद ज्यादा होने से दाम घट गए तो आवंला उगाना कम हो गया। हमें विचार करना होगा कि किस प्रकार ऐसी चीजों को उगाएं। कितनी जरूरत यह आकलन करके उगाना होगा। मनरेगा से वन उत्पादन को जोडऩे पर विचार करना होगा। इस पर प्लानिंग की जाएगी।
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किसके क्या सुझाव-
मध्यप्रदेश आयुष का हब बन सकता है। कटनी में हमारा बडा हब है। आंवला हम मध्यप्रदेश से ले रहे है। प्रदेश से हम 500 मीट्रिक उत्पाद लेते हैं। यहां वेयर हाउस सुविधा मिलना चाहिए। फूड प्रोसेसिंग में प्रदेश देश में अव्वल हो सकता है।
- मोहित मल्होत्रा, सीईओ, डॉबर कंपनी
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मध्यप्रदेश को हेल्थ डेस्टिनेशन बनाया जा सकता है। इस पर काम होना चाहिए। इसके लिए अच्छा इंफ्रास्ट्रक्चर देना होगा, तभी बच्चे यहां भविष्य देखेंगे। यहां रोजगार और निवेश दोनों बढ़ाना होंगे।
- राजीव वासुदेवन, सीएमडी, आयुर्वेद गु्रप, बैंगलोर
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ग्राम सभाओं के साथ मिलकर हम काम करेंगे तो कई औषधियों का ज्ञान हमें मिल सकता है। ग्रामीणों को मोटिवेट करके औषधी उत्पादन बढ़ाया जा सकता है। कुछ पायलेट प्रोजेक्ट लाए जा सकते हैं।
- गिरीश कुबेर, वनवासी कल्याण आश्रम
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मध्यप्रदेश देश का दिल है, यह अब ग्रीन लंग्स ऑफ इंडिया बने। नीमच अश्वगंधा की ग्लोबल मंडी है।
औषधी, वनस्पति और मंडी के क्षेत्र में देश में उदाहरण मध्यप्रदेश बनेगा। पन्ना का आंवला देश में सबसे अच्छी गुणवत्ता का है।
- रंजीत पुराणिक, श्री धुतपापेश्वर लिमिटेड मुंबई
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