मोबाइल से शूट कर रहे शॉर्ट फिल्म-डॉक्यूमेंट्री, नेशनल-इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में हो रहीं सलेक्ट - Web India Live

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मोबाइल से शूट कर रहे शॉर्ट फिल्म-डॉक्यूमेंट्री, नेशनल-इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में हो रहीं सलेक्ट

भोपाल। शहर के यूथ अब मोबाइल कैमरे से शॉर्ट फिल्म, डॉक्यूमेंट्री से लेकर मूवी तक शूट कर रहे हैं। इनकी बनाई फिल्मों की क्वालिटी भी इतनी अच्छी होती है कि ये नेशनल-इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल के लिए भी सलेक्ट हो रही है। यूथ का कहना है कि कोरोना महामारी के बाद मोबाइल कैमरे की प्रासंगिकता और बढ़ गई है क्योंकि उस समय हम घर के बाहर भी नहीं निकल पा रहे थे तो मोबाइल और सॉफ्टवेयर की मदद से घर बैठकर ही कई गानें और एड फिल्म शूट किए। मोबाइल से बनी फिल्म-डॉक्यूमेंट्रीज ने ही उन्हें अलग पहचान दिलाई।

एडिटिंग हो गई आसान
आदर्श शर्मा ने बताया कि मैं डॉक्यूमेंट्री और शॉर्ट फिल्मस बनाता हूं। मोबाइल में अब कई ऐसे ऐप्स आ गए हैं, जिसकी मदद से एडिटिंग तेजी से की जा सकती है और क्वालिटी भी काफी अच्छी मिलती है। शॉर्ट मूवी शूट करने के लिए मोबाइल एक अच्छा साधन है। लॉकडाउन में जब हम घर से बाहर नहीं निकल सकते थे, तब मोबाइल कैमरा सबसे अच्छा विकल्प बनकर उभरा। हाल ही में हमने ये हौसला... गाना शूट किया। वहीं, ढूंढता है मन मेरा... गाने को कविता के रूप में पेश किया।

कलकत्ता फिल्म फेस्टिवल में टॉप-10 में आई शॉर्ट फिल्म
नीलेश सिंह सिसौदिया ने बताया कि मैं दो यू-ट्यूब चैनल चलता है। आप हर जगह भारी कैमरा लेकर नहीं चल सकते। ऐसे में शॉर्ट फिल्म, डॉक्यूमेंट्री यहां तक की मूवी बनाने में भी मोबाइल बहुत मददगार साबित होता है। अब मार्केट में काफी अच्छे रिजोलुशन वाले मोबाइल कैमरे आ रहे हैं तो वीडियो के लिए हैवी वीडियो कैमरे की जरूरत नहीं पड़ती। मूवी शूट करने के लिए आपका विजन अच्छा होना सबसे ज्यादा जरूरी है। मेरी शॉर्ट फिल्म वी आर मोर देन फ्रेंड्स ने कलकत्ता फिल्म फेस्टिवल में टॉप-10 में जगह बनाई थी। वहीं, डॉक्यूमेंट्री एवरेस्ट गर्ल को यूके फिल्म फेस्टिवल के लिए भेज रहा हूं। वहीं, इच्छा मृत्यू के मुद्दे पर भी एक फिल्म डॉक्यूमेंट्री शूट कर चुका हूं।

शॉर्ट फिल्म और एड करता हूं शूट
सुनीत श्रीवास्तव ने बताया कि मोबाइल में शूट करने में कम से कम क्रू मेंबर्स की जरूरत होती है जबकि वीडियो कैमरे में ऐसा नहीं किया जा सकता। अब मोबाइल से 4के शूट हो जाता है तो क्वालिटी भी अच्छी होती है। मैंने इससे कई एड फिल्मस भी शूट की हैं। मेरी एक मराठी शॉर्ट फिल्म मराठी येत नाही भी मामी फिल्म फेस्टिवल में सलेक्ट हो चुकी है। यह मुंबई में रहने वाले हिंदी भाषियों पर बेस्ड है। मोबाइल से शूट करने में अपना विजन क्लियर रखेंगे और शॉर्ट एंगल अच्छा होगा तो लोग इसे पसंद करेंगे।



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