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कॉन्वेंट स्कूल में शिक्षा, भाई-बहन करते हैं कथा-प्रवचन

प्रवीण मालवीय
भोपाल. सामान्यत: बच्चों का रुझान खेलकूद, मोबाइल, टीवी और रोमांच की गतिविधियों की ओर ज्यादा रहता है, अभिभावकों को उनका ध्यान पढ़ाई पर केन्द्रित कराना बड़ी चुनौती होता है। लेकिन इसी उम्र में शहर के दो बच्चे न केवल खुद आध्यात्मिक ज्ञान की गंगा में डुबकी लगा रहे हैं बल्कि अन्य लोगों को भी धर्म और आध्यात्म की ओर प्रवृत्त कर रहे हैं। यह दोनों आपस में भाई-बहन हरेप्रियादासी एवं कृष्णदास हैं। दोनों पिछले पांच वर्षों से लगातार श्रीमद्भागवत कथा, श्रीराम कथा एवं श्रीम‍दभगवतगीता पर प्रवचन करते आ रहे हैं। इतना ही नहीं दोनों आध्यात्मिक गतिविधियों के साथ ही स्कूली शिक्षा में भी श्रेष्ठ प्रदर्शन कर रहे हैं।

कम उम्र से धर्म की ओर रुझान

हरेप्रियादासी ने बताया कि परिवार और पूर्वजों के संस्कार से बचपन से ही प्रभु भक्ति में मन लगने लगा था। परिजनों के साथ हम दोनों ने रामचरित मानस का अध्ययन शुरू किया। परिवार में आध्यात्मिक चर्चा होती थी वहीं जहां संत महात्मा मिलते थे सभी उनके पास जाकर सत्संग करते। इस क्रम में एक बार सड़क पर पुस्तक बांट रहे इस्कॉन के एक भक्त से रास्ते में मुलाकात हुई। उनकी बातों से लगा कि यही वह सत्य है जिसकी हमें तलाश थी। फिर हम निरंतर कृष्ण मंदिर जाने लगे। मंदिर और घर के धार्मिक माहौल में हम भाई-बहन कृष्ण लीलाओं और प्रभु कृपा की चर्चा करते जिससे प्रभु के प्रति अनुराग और धर्म को जानने की जिज्ञासा बढ़ती गई।

पढ़ाई के साथ लगाया कथाओं का शतक
बच्चों के बड़े पिताजी देवेश एवं मुकेश पाठक का कहना है कि, दोनों बच्चे कॉलोनी में इस्कॉन से प्रदान की जाने वाली भगवद गीता का वितरण करने जाते थे। वहां सभी लोगों को इन किताबों और धर्म के बारे में बताते थे। जिस भी घर में जाते लोग तारीफ कि इतने छोटे बच्चे और इतना अच्छा संस्कार और ज्ञान। इसी बीच एक पुलिस अधिकारी ने हरिप्रियादासी की बातें सुनी तो कहा कि हम तो इसी बेटी से कथा कराएंगे। इसके साथ ही छोटे स्तर से शुरू हुआ कथाओं का सिलसिला बढ़ता गया। बहन के सानिध्य में छोटे भाई कृष्णदास ने भी साढ़े सात साल की उम्र में प्रवचन आरंभ कर दिए। 2016-17 से दोनों भाई बहनों ने भागवत कथा और रामकथा शुरू कर दी और आगे बढ़ते गए। तबसे दोनों बच्‍चे देश के अनेक नगरों में कथायें कर चुके हैं।

आध्यात्म से मिली एकाग्रता, शैक्षणिक प्रदर्शन भी सुधरा

हरेप्रियादासी जिनका स्‍कूल में नाम आयुषी पाठक है। आयुषी ने बीएचईएल स्थित कार्मल कान्वेंट स्कूल से हाल ही में 12 वीं की पढ़ाई पूरी की है। इस परीक्षा में आयुषी ने 93.4 प्रतिशत अंक प्राप्‍त किये हैं। वहीं कृष्णदास जवाहरलाल नेहरू स्‍कूल में आठवी कक्षा के छात्र हैं। उन्होंने लगभग 88 प्रतिशत अंक प्राप्‍त किए। इसी बीच आध्यात्मिक शिक्षा इस्‍कॉन से प्राप्‍त की। वर्तमान में दोनों एकआध्यात्मिक गुरू रसानंद दास जी के सानिध्‍य में भेल के बरखेड़ा में स्थित इस्‍कॉन मंदिर में शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं।

करते हैं बच्चों को संस्कारों की ओर प्रेरित
दोनों का कहना है कि कथा का मुख्‍य उद्देश्य भगवान नाम का प्रचार और बच्‍चों में धार्मिक संस्‍कारों का विकास करना है यदि बच्‍चे संस्‍कारी होंगे तो यह तय है कि वे भगवान के साथ देश की, समाज की और माता पिता की विधिवत सेवा कर सकेंगे। इसलिए हम अपनी अधिकांश कथाओं में बच्‍चों को इस बात के लिये प्रेरित करते हैं कि वे अपने माता-पिता एवं गुरूजनों के प्रति आज्ञाकारी हों तथा बुरी संगत से हमेशा दूर रहें। बच्चों की बातों का बच्‍चों पर सीधा प्रभाव पड़ता है ।

श्रीमद भागवत का ऑनलाइन प्रवचन

वर्तमान में संक्रमण काल की परिस्थितियों में दोनों ऑनलाइन कथा एवं प्रवचन कर रहे हैं। हरेप्रियादासी बच्चों को संस्कृत भी पढाती और स्‍वयं भी आगे संस्कृत में ही उच्‍च शिक्षा प्राप्‍त करना चाहती हैं। इसी प्रकार कृष्णदास भी ऑनलाइन भगवतगीता एवं रामकथा करते हैं। कृष्णदास एवं हरेप्रियादासी यू टयूब पर गोविन्‍द पादाश्रय नाम के चैनल पर भगवान की विभिन्‍न लीलाओं, कथाओं पर आधारित वीडियो भी अपलोड करते हैं।


बरखेड़ा इस्कॉन के प्रमुख रसानंद दास जी का कहना है कि, ये बच्चे पिछल्े सात-आठ सालों से गंभीरतापूर्वक आध्यात्मिक शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। यहां ऐसे अनेक बच्चों को आध्यात्मिक शिक्षाओं की व्यवस्था की गई है।



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