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सीए फाइनल: तीन साल से भोपाल से किसी प्रतिभागी को नहीं मिल पाई एआइआर

भोपाल। द इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टड एकाउंटेंट ऑफ इंडिया (आइसीएआइ) ने सोमवार को सीए फाइनल जुलाई का परिणाम जारी किया। भोपाल ब्रांच से इस बार ओल्ड सिलेबस में 171 स्टूडेंट्स एग्जाम में शामिल हुए थे, जिसमें से 24 पास हुए। वहीं, न्यू सिलेबस से 463 स्टूडेंट्स शामिल हुए और 113 ने सफलता पाई। भोपाल चैप्टर के चेयरमैन सीए अंशुल अग्रवाल ने बताया कि कोरोना के चलते यह परीक्षा मई में स्थगित होकर जुलाई में आयोजित की गई। तीन साल से किसी स्टूडेंट को एआइआर नहीं मिल पाई है। ओल्ड सिलेबस का 14.04 और न्यू सिलेबस का 24.41 प्रतिशत रिजल्ट रहा है।

आसपास के नेगेटिव माहौल से खुद को बचाए रखा
एग्जाम में 800 में से 490 अंक हासिल करने वाले विनम्र श्रीवास्तव ने बताया कि मैंने मैंने स्टडीज में गैप नहीं किया, जिस दिन गैप हो जाता तो दूसरे दिन कवर करता था। स्कूल टाइम से ही कॉन्सेप्ट क्लियर रखे। कोरोना और लॉकडाउन के चलते पढ़ाई काफी चैलेंजिंग हो गई थी। ऑनलाइन क्लासेस के लिए खुद को तैयार किया। आसपास के नेगेटिव माहौल से खुद को बचाए रखा। कभी खुद को तनाव में नहीं आने दिया। माता-पिता ने हमेशा पढ़ाई के लिए मोटिवेट करते रहे।

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चार से पांच बार कोर्स को रिवाइज जरूरी
वहीं, 467 अंक हासिल करने वाली रिचा धनोतिया ने बताया कि मैं अपने परिवार की पहली सीए हूं। दादाजी ने इस फील्ड में आने के लिए मोटिवेट किया। सीए क्लियर करने के लिए कम से कम से चार से पांच बार कोर्स को रिवाइज जरूरी है। मैं ऑडिटिंग फील्ड में जॉब करना चाहती हूं। मुझे बेहतर रैंक की उम्मीद थी। कोरोना के चलते एग्जाम स्थगित हुआ, लेकिन मैंने तैयारी को जारी रखा ताकि जब भी एग्जाम की डेट आए तनाव से बच सकूं।

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भाई-बहन को कोरोना हुआ तो खुद को क्वारंटीन किया
सीए फाइनल में 460 अंक हासिल करने वाली विजेता सिंह ने बताया कि मेरा पिता एसबीआइ में हैं। उन्हें देख इस फील्ड में आने के लिए मोटिवेट हुई। मैंने एग्जाम की तैयारी नवंबर से ही शुरू कर दी थी। लगातार मॉक टेस्ट दिए। पैटर्न को समझने और किसी टॉपिक में दिक्कत होने पर सीनियर्स की मदद लेती थी। मैं बैंकिंग सेक्टर में करियर बनाना चाहती हूं। एग्जाम से पहले छोटे भाई-बहन को कोरोना हो गया था। खुद को एक कमरे में क्वारंटीन कर पढ़ाई की।

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एग्जाम के छह माह पहले मैंने प्रीपरेशन लीव ली थी
वहीं, 457 अंक हासिल करने वाले शांतनु मारन ने बताया कि एग्जाम के छह माह पहले मैंने प्रीपरेशन लीव ली थी। मैंने 8 से 10 घंटे पढ़ाई की। सोशल मीडिया भी छोड़ दिया था बस स्टडी ग्रुप पर फोकस करता था। मेरे पापा को कोरोना हो गया था, इस दौरान 20 दिन काफी तनाव में गुजरे। उस दौरान जो माहौल बना था, वह काफी परेशान करने वाला था। मैंने हिम्मत नहीं हारी और एग्जाम से पहले 40 दिनों में 8 सब्जेक्ट को अच्छी तरह से तैयार किया।



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