कॉलेजों के कार्यालय में छात्रों और परिजनों को बुलाकर जीतते थे भरोसा - Web India Live

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कॉलेजों के कार्यालय में छात्रों और परिजनों को बुलाकर जीतते थे भरोसा

भोपाल. मेडिकल और इंजीनियरिंग के अलावा मैनेजमेंट कॉलेजों में दाखिला दिलाने का झांसा देकर छात्रों से ठगी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह और कॉलेज प्रबंधन व कर्मचारियों की सांठगांठ की जांच की जा रही है। एसटीएफ की जांच के दायरे में अब कॉलेज भी हैं। मालूम हो कि पिछले दिनों एसटीएफ ने ठग गिरोह के सरगना संदीप करवरिया निवासी बागमुगालिया (भोपाल) और दीपक कुमार निवासी मधुबनी (बिहार) को रीवा के एक छात्र से गांधी मेडिकल कॉलेज, भोपाल में एमसीआइ कोर्ट से एमबीबीएस में दाखिला दिलाने के नाम पर 36 लाख की ठगी के मामले में पकडा था। पूछताछ के बाद दो और आरोपियों कृष्णकांत शर्मा निवासी पटना (बिहार) और अजीत प्रताप सिंह चौहान (आगरा) को पकड़ा गया। एक अन्य आरोपी देवराज मिश्रा उर्फ सेतु कुमार निवासी पटना (बिहार) फिलहाल फरार है। पूछताछ में चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि आरोपी पहले नीट परीक्षा देने वाले छात्रों का डाटा निकालते थे और इन्हें फोन कर एमसीआइ पूल कोटे से मनचाहे मेडिकल कॉलेज में दाखिला दिलाने का भरोसा देते थे। विश्वास जमाने के लिए बल्क मैसेज सिस्टम से संबंधित के मोबाइल पर एडमिशन संबंधी मैसेज भेजा जाता था। यदि कोई छात्र या उसके परिजन कॉलेज आकर बात करने का बोलते तो आरोपी उन्हें कॉलेज भी ले जाते। यहां कार्यालय में बैठाकर बात की जाती थी। आरोपियों से मिली जानकारी के बाद पूरे फर्जीवाड़े में कॉलेज प्रबंधन और उनके कर्मचारियों की मिलीभगत सामने आई है। सूत्रों के मुताबिक एक आरोपी ने तो एक कॉलेज के डीन के कार्यालय में बैठकर छात्र से बात की और उसे यकीन दिलाया। एसटीएफ डीएसपी केतन अडलक के मुताबिक पूरे मामले में कॉलेज प्रबंधन या उनके कर्मचारियों की संलिप्तता की जांच की जा रही है।

केके ने मैनेजमेंट कोटे से कराए यहां दाखिले
हाल में पकड़ में आए कृष्णकांत शर्मा उर्फ केके निवासी पटना (बिहार) से हुई पूछताछ में पता चला कि उसने मेडिकल की स्नातक और स्नातकोत्तर सीटों पर कई मेडिकल कॉलेजों में छात्रों को 60 लाख से लेकर 1.60 करोड़ रुपए में दाखिला कराया है। जिन कॉलेजों में दाखिला कराया गया उनमें से लता मंगेशकर कॉलेज (नागपुर), कीम्स मेडिकल कॉलेज (बेंगलुरु), दत्तामेघे मेडिकल कॉलेज (नागपुर) प्रमुख हैं। इसके अलावा भोपाल के पीपुल्स मेडिकल कॉलेज, आरकेडीएफ मेडिकल कॉलेज, एलएन मेडिकल कॉलेज कीम्स मेडिकल कॉलेज बैंगलुरू, सुभैया मेडिकल कॉलेज (कर्नाटक) आइपीजीएमआर मेडिकल कॉलेज कोलकाता, लोकमान्य तिलक मेडिकल कॉलेज मुंबई, एमबीबीएस, बीडीएस और बीएएमएस में तो कई इंजीनियिरिंग कॉलेजों में एडमिशन दिलाने के नाम पर भी ठगी की गई।
संदीप-केके के खिलाफ दर्ज हैं कैस
गिरोह का सरगना संदीप करवरिया वर्ष 2013 से ठगी के धंधे में हैं। उसके खिलाफ हबीबगंज थाने में धोखाधड़ी का प्रकरण दर्ज है। संदीप ने खुद को असिस्टेंट प्रोफेसर बताकर पीएनबी बैंक में सेलरी अकाउंट खुलवाया था। ठगी की रकम इसी खाते में आती थी। इधर, कृष्णकांत उर्फ केके के खिलाफ भी झाखंड में पहले से केस दर्ज हैं। गिरोह के सभी सदस्य एडमिशन कराने के गोरखधंधे के चलते एक-दूसरे के संपर्क में आए और संगठित होकर काम करने लगे। अभी तक 34 लोगों से तीन करोड़ से अधिक की ठगी का खुलासा हो चुका है। गिरोह ने मप्र, उप्र, दिल्ली, झारखंड, कर्नाटक और केरल के अलावा कई राज्यों के छात्रों से ठगी की है। पीडि़तों की संख्या कहीं अधिक है।



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