अफसरों पर सख्ती, सरकार को पैसे खर्च करने का पाई-पाई का देना होगा हिसाब
भोपाल. एमपी में अफसरों पर सख्ती बरती जाने लगी है। अब अफसरों को सरकार को पैसे खर्च करने का पाई—पाई का हिसाब देना होगा। 6 माह के मूल वेतन से अधिक के खर्च पर सरकार को जानकारी देनी होगी। इस तरह नौकरशाहों के खर्चों पर अब राज्य सरकार की सीधी नजर है। अब राज्य के आइएएस, आइपीएस और आइएफएस अफसरों को सरकार को खर्चे का ब्यौरा देना है।
राज्य सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग (कार्मिक) द्वारा जारी आदेश में नौकरशाहों से कहा गया है कि यदि शेयर बाजार, शेयर या अन्य निवेश में उनका कुल लेनदेन वित्तीय वर्ष के दौरान उनके छह माह के मूल वेतन से अधिक होता है तो वे इसकी जानकारी मुहैया करवाएं। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि यह जानकारी अखिल भारतीय सेवा (आचरण) नियमावली 1968 के नियम 16(4) के तहत उनके द्वारा दी जाने वाली इसी प्रकार की जानकारी से अतिरिक्त होगी।
मौजूदा नियमों के तहत अफसरों को दो माह के मूल वेतन से अधिक के चल संपत्ति के ट्रांजेक्शन की जानकारी देना अनिवार्य है। राज्य सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग ने केन्द्र सरकार के कार्मिक मंत्रालय का आदेश भी संलग्र किया है।
31 जनवरी तक हर हाल में देनी होगी जानकारी -
अफसरों से कहा गया है कि वे निर्धारित प्रोफार्मा में जानकारी भेजें। वित्तीय वर्ष की 31 जनवरी तक हर हाल में सरकार को इसे उपलब्ध कराना होगा। इस प्रोफार्मा में नाम, पदनाम, निवेश, खरीदी आदि का ब्यौरा शामिल है। साथ ही स्वयं के हस्ताक्षर के साथ यह घोषणा भी करनी होगी कि उनके द्वारा दी गई जानकारी सही है।
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