विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के गोद लिए इस गांव के अब तक नहीं सुधरे हाल
भोपाल। देवास के खातेगांव में स्कूल भवन का निर्माण कार्य आठ साल में पूरा नहीं हो पाया। अस्पताल चार साल बाद भी अधूरा है। खेल मैदान के विकास के नाम पर झुग्गी झोपड़ी व दुकानें तोड़ दी गई हैं। गांव में कच्ची सड़कें हैं। नालियों का पानी इन पर बहता रहता है।
यह बदहाल तस्वीर देवास के खातेगांव विधानसभा क्षेत्र के अजनास गांव की है। अजनास को चार साल पहले केंद्रीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने गोद लिया था। वे यहां की सांसद भी हैं। सुषमा ने सांची के एक और गांव हरदौट को गोद लिया था, उसका भी ऐसा ही हाल है।
ग्रामीणों का आरोप है कि सुषमा ने गांव की ओर ध्यान नहीं दिया। ऐसा भी नहीं है कि विकास बिल्कुल नहीं हुआ। जो काम हुए उनसे समस्याएं और बढ़ गईं। गंदगी पसरी हुई है। नालियों का पानी सड़कों पर बह रहा है।
800 बच्चे, बैठने की तक जगह नहीं...
अजनास में हायर सेकंडरी स्कूल तक 800 से अधिक बच्चे हैं, लेकिन इनके बैठने के लिए जगह कम है। आठ साल से विद्यालय भवन का निर्माण चल रहा है, लेकिन भवन स्कूल शिक्षा विभाग को नहीं मिला है।
बच्चे सीलन भरे कमरों में बैठते हैं। विद्यालय के शौचालय गंदगी से अटे हैं। दो साल पहले कांग्रेस नेता सज्जन सिंह वर्मा ने यहां की स्कूल की समस्याओं को लेकर आंदोलन किया था। अब वे लोक निर्माण मंत्री हैं, फिर भी हालात नहीं बदले।
दीदी पार्क बदहाल
अजनास में सड़क के किनारे एक छोटा सा पार्क बनाया गया है। इसकी देख-रेख नहीं होने के कारण बदहाल है। चारों तरफ फैली गंदगी से लोग इससे बचते रहते हैं। गांव में खेल मैदान की कमी है, इससे बच्चे जगह के लिए या तो आपस में झगड़ते हैं।
अजनास एक नजर
6000 : आबादी
3300 : वोटर
200 : बीपीएल परिवार
डॉक्टर भी परेशान हैं
अस्पताल के लिए दो कमरे हैं। एक में स्टोर रूम है। दूसरे में मरीजों की जांच की जाती है। अव्यवस्थाओं से डॉक्टर भी खिन्न हैं। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के निर्माण की मंजूरी मिल चुकी है, लेकिन चार साल से इसका निर्माण ही चल रहा है। पशु औषधालय स्वीकृत हुआ, लेकिन भवन का निर्माण नहीं हुआ।
हालात बदले हैं : विधायक
भाजपा विधायक आशीष शर्मा का दावा है कि बाकी गांवों की तुलना में अजनास काफी बेहतर है। निर्माण कार्यों के लिए राशि आवंटित हो चुकी है, लेकिन जगह की समस्या है।
अस्पताल भवन का काम भी चल रहा है। स्वच्छता के प्रयास भी कर रहे हैं, लेकिन इसमें लोगों की जागरुकता जरूरी है।
रोजगार के लिए अगरबत्ती का प्रशिक्षण मिला है। सामुदायिक भवन में अगरबत्ती बनाते हैं। दिनभर की मेहनत के 90 रुपए मिलते हैं। गांव को गोद लेने के बाद कोई बेहतरी नहीं आई है।
- सुमंत्रा हरियाले
मार्केट में गरीबों की झुग्गी-झोपड़ी भी तुड़वा दी। वहां ग्राउंड बनवा दिया। हम गरीब लोग तो ऐसे ही भटक रहे हैं। मेरा तो मकान भी नहीं है, ये मशीन रखवा दी है, लेकिन कोई फायदा नहीं है।
- सावित्री हरियाले
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