16 साल पुरानी जंग: क्या अब अपनी उस शिकस्त का बदला ले पाएंगे शिवराज सिंह! - Web India Live

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16 साल पुरानी जंग: क्या अब अपनी उस शिकस्त का बदला ले पाएंगे शिवराज सिंह!

भोपाल। मध्यप्रदेश में भाजपा की 4 वीआइपी सीटों में से एक है भोपाल। जिस पर पिछले 3 दशकों से बीजेपी ने अपना कब्जा बरकरार रख रखा है।

लेकिन इस बार कांग्रेस की ओर से भी पूरी ताकत लगाते हुए राजनीति के महारथी दिग्विजय सिंह को इस सीट से उतारा गया है। जिन का नाम सामने आते ही भाजपा में हड़कंप मच गया है।

ऐसे में अब ये साफ हो चुका है कि इस बार भोपाल में मुकाबला आसान नहीं होगा। कुल मिलाकर लोकसभा चुनाव 2019 (Lok Sabha Elections 2019) में मध्‍यप्रदेश की भोपाल सीट पर अब सबकी निगाहें रहेंगीं।

वहीं दूसरी ओर भाजपा की ओर से अब तक अपना प्रत्याशी घोषित नहीं किया गया है, वहीं दिग्विजय के सामने आने के बाद भाजपा की ओर से इस बार भोपाल सीट से शिवराज का नाम चर्चाओं में है।

कुल मिला कर इस बार यदि भाजपा की ओर शिवराज भोपाल से मैदान में आते हैं, तो राजधानी में इस बार दो पूर्व सीएम का मुकाबला बेहद रोचक और घमासान होने की उम्मीद है।


16 साल पहले हुई थी दिग्‍व‍िजय और शिवराज की भिड़ंत...
क्या आप जानते है कि यदि भोपाल में दिग्‍व‍िजय सिंह के सामने बीजेपी ने शिवराज को उतारा तो ये दोनों की दूसरी बार भिड़ंत होगी। जिसे लेकर जहां एक पुन: अपनी जीत को बरकरार रखने के लिए लड़ेगा, वहीं दूसरा अपनी पुरानी हार का बदला लेने के लिए...

जी हां, इससे पहले 2003 में विधानसभा चुनाव के दौरान ये दोनों दिग्गज आपने सामने आ चुके हैं और आज की तारीख में उस चुनाव में एक पूर्व सीएम दूसरे पूर्व सीएम को पटखनी भी दे चुका है। उस समय भाजपा ने राघोगढ़ में दिग्‍व‍िजय सिंह के सामने शिवराज को उतार दिया था।

दिग्‍व‍िजय तब प्रदेश के मुख्‍यमंत्री थे। इस चुनाव में शिवराज को हार का सामना करना पड़ा था, लेकिन उन्‍होंने दिग्‍व‍िजय सिंह को उनके ही घर में अच्‍छी टक्‍कर दी थी।

वहीं जानकारों की मानें तो इस बार मामला अलग है। अब शि‍वराज भी करीब 13 साल मप्र के सीएम रह चुके हैं और प्रदेश का लोकप्रिय चेहरा भी हैं। वहीं भोपाल में चुनाव यानि दिग्‍व‍िजय अपनी होम टर्फ पर नहीं हैं।

ये है शिवराज को यहां लाने का कारण!...
दरअसल शिवराज को भोपाल से चुनाव लड़ाने के पीछे जो कारण सामने आ रहे हैं, उनके अनुसार 18 लाख मतदाताओं वाली भोपाल संसदीय सीट पर चार लाख से अधिक मुस्लिम मतदाता हैं, जिनमें से काफी चौहान के समर्थक हैं।

वहीं पिछले तीन दशकों से भोपाल लोकसभा सीट भाजपा का गढ़ रहा है, इसलिए इस सीट को बनाए रखने के इरादे से पार्टी ने अपनी रणनीति पर नए सिरे से विचार करना शुरू कर दिया है।

सूत्रों के अनुसारा बीजेपी आलाकमान भी ये समझता है कि अगर शिवराज नहीं तो उसे भोपाल जैसी सीट को बचाने के लिए उसे किसी फायरब्रांड नेता की जरूरत पड़ेगी, लेकिन बीजेपी के पिछले 15 साल के शासन में बीजेपी के पास मप्र में कोई ऐसा नेता नहीं बचा है।

ऐसे में शिवराज सिंह चौहान ही हैं, जो दिग्‍व‍िजय सिंह से टक्‍कर ले सकते हैं। जबकि जानकार ऐसे में बाबूलाल का नाम भी सुझाते दिख रहे हैं।

शिवराज के मायने....
चर्चा है कि मध्‍यप्रदेश में बीजेपी के पास शिवराज जितना कोई बड़ा चेहरा नहीं है। वहीं कई लोग साध्‍वी प्रज्ञा का नाम भी उछाल रहे हैं, लेकिन जानकारों की मानें तो साध्‍वी प्रज्ञा ने कभी बीजेपी में काम नहीं किया।

ऐसे में भोपाल में बीजेपी उन पर दांव लगाएगी, इस पर संशय है। इसके अलावा दिग्‍व‍िजय सिंह अपने मैनेजमेंट के लिए जाने जाते हैं, ऐसे में जानकार भी मानते ही बीजेपी की ओर से कोई बड़ा चेहरा ही उन्‍हें चुनौती दे सकता है।

आखिरी बार 1984 में जीती...
दरअसल वर्ष 1984 में हुए लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने भोपाल सीट से जीत दर्ज की थी। उस समय इंदिरा गांधी की हत्या के बाद देश में कांग्रेस की लहर थी, ऐसे में भोपाल से केएन प्रधान जीते थे। करीब 35 साल पहले ये कांग्रेस की इस सीट पर आखिरी जीत थी।

इस सीट को भाजपा ने वर्ष 1989 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस से छीनी थी और तब से लेकर अब तक इस सीट पर आठ बार चुनाव हुए हैं और आठों बार भाजपा ने कांग्रेस के प्रत्याशियों को पटखनी दी है। इस बार भोपाल सीट पर मतदान 12 मई को होगा।

प्‍लान बी पर काम शुरू...
आठ विधानसभा क्षेत्रों वाली भोपाल संसदीय सीट पर पिछले साल नवंबर में विधानसभा चुनाव हुए। इस दौरान इनमें से तीन सीटों पर कांग्रेस ने जीत दर्ज की, जबकि भाजपा पांच सीटों पर जीती।

भले ही भाजपा को इन आठ विधानसभा सीटों पर कांग्रेस से ज्यादा मत मिले थे, लेकिन दोनों दलों के बीच मतों का अंतर ज्यादा नहीं था। सूत्रों के अनुसार भाजपा की प्रदेश चुनाव समिति ने पहले भोपाल के महापौर आलोक शर्मा और भाजपा के प्रदेश महासचिव वीडी शर्मा का नाम पार्टी की केन्द्रीय चुनाव समिति को भेजा था, लेकिन कांग्रेस द्वारा दिग्विजय को भोपाल सीट से उतारे जाने के बाद भाजपा ‘बी प्लान’ पर काम कर रही है।



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