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बम-बम भोले के गूंजेंगे जयकारे

भोपाल/बैरागढ़/मंडीदीप. शिव आराधना का पर्व महाशिवरात्रि 4 मार्च को हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा। इस मौके पर शहर सहित आस-पास के कई नगरों में भगवान शिव की पूजा-अर्चना के साथ बारात निकाली जाएगी। शिवालयों में पर्ष को लेकर तैयारियां अंतिम दौर में चल रही है।

कई मंदिरों में शिवरात्रि महोत्सव की शुरुआत भी हो गई है। इसके तहत कई आयोजन किए जाएंगे। महाशिवरात्रि पर्व पर शहर में कई जगहों पर भंडारे का आयोजन किया जाएगा। नए और पुराने शहर में कई स्थानों पर ढोल-ढमाकों के साथ शिव बारात निकाली जाएगी। इसमें आकर्षक झांकियां, बैंड, ढोल, डीजे के साथ बाराती के रूप में अलग-अलग स्वरूपों में श्रद्धालु शामिल होंगे। इसके लिए तैयारियां शुरू हो गई हैं।

 

भोजपुर : शिवरात्रि पर शिव भक्तों का लगेगा मेला
विश्व प्रसिद्व शिवधाम भोजपुर मंदिर का निर्माण धार के प्रसिद्ध राजा भोज ने 1010 से 1053 ई में किया था, इसे भोजेश्वर मंदिर भी कहा जाता है। महाशिवरात्रि पर यहां लाखों लोग दर्शन के लिए पहुंचते हैं। भोजपुर शिवालय न्यास ने इसको लेकर पुख्ता तैयारी की है।

शिवरात्रि पर एक लाख से ज्यादा शिव भक्त भोजपुर पहुंचकर भोलेनाथ के दर्शन करते हैं। इस दिन शिवलिंग का विशेष श्रंृगार और अभिषेक किया जाएगा। मंदिर के महंत पवन गिरि गोस्वामी ने बताया कि शिवरात्रि पर तड़के 4 बजे से पूजा-अर्चना शुरू हो जाएगी।

बड़वाले महादेव : गणेश पूजा के साथ हुई कलश स्थापना
शहर के बड़वाले महादेव मंदिर में मंगलवार को गणेश पूजा के साथ 20 दिवसीय महाशिवरात्रि महोत्सव की शुरुआत हो गई। 20 दिनों तक चलने वाले इस महोत्सव के अंतर्गत अनेक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। मंगलवार शाम को वैदिक पंडितों की उपस्थिति में विधि-विधान से गणेश पूजन हुआ और कलश स्थापना की गई। 2 मार्च को मेहंदी हल्दी रस्म बड़वाले महादेव मंदिर और भवानी मंदिर सोमवारा में होगी। 3 मार्च को विशेष शृंगार प्रदोष के उपलक्ष्य में किया जाएगा और 4 मार्च को महाशिवरात्रि पर शिव बारात निकलेगी। यह महोत्सव 18 मार्च तक चलेगा।

गुफा मंदिर : शिवमयी हो जाता है प्रसिद्ध संत नगर का शिव मंदिर
लालघाटी स्थित गुफा मंदिर में हर साल महाशिवरात्रि का पर्व धूमधाम से मनाया जाता है। यहां इस दौरान भगवान भोलेनाथ का विशेष श्रृंगार किया जाता है और मंदिर को फूल-मालाओं से सजाया जाता है। इसके साथ ही मेले का आयोजन किया जाता है। यह मंदिर सात प्राकृतिक गुफाओं से गिरा हुआ है इसलिए इसे गुफा मंदिर कहा जाता है।

मंदिर में भव्य शिवलिंग है। एक गुफा में स्वयं-भू शिव की पिंडी है, जबकि बाकी गुफाओं में संस्कृत के विद्यार्थी रह रहे हैं। मंदिर के पुजारी दिन-रात भगवान शिव की आराधना करते हैं। हर पहर में महामृत्युंजय जाप होता है।



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