शुक्रवार को घी का दीपक जलाकर अपने घर में ही एक बार कर लें ये काम, छप्पर फाड़ के बरसेगा धन - Web India Live

Breaking News

शुक्रवार को घी का दीपक जलाकर अपने घर में ही एक बार कर लें ये काम, छप्पर फाड़ के बरसेगा धन


शुक्रवार का दिन माता महालक्ष्मी का प्रिय शुभ दिन माना जाता हैं, ऐसी मान्यता है कि इस दिन धन प्राप्ति के लिए जो भी उपाय किये जाते हैं वे सफल होते है । लेकिन एक ऐसा भी सरल उपाय जिसको केवल 3 बार करने से मां लक्ष्मी हमेशा के लिए स्थाई रूप से निवास करने लगती हैं । शुक्रवार के दिन इस उपाय को करने वाले को छप्पर फाड़ के धन मिलने लगता है । जाने आखिर कौन सा उपाय करने से आपकी इच्छाएं पूरी हो सकती है ।

शुक्रवार के दिन सूर्योंदय से पूर्व स्नान करने अपने घर के ही पूजा स्थल पर बैठकर गाय के घी का दीपक जलाकर लाल रंग के आसन पर रख दें, और लाल फुल, सफेद सावल हाथ में लेकर मां लक्ष्मी का आवाहन उसी दीपक के प्रकाश में करें । इतना करने के बाद माता महालक्ष्मी की इस स्तुति लक्ष्मी चालीसा का श्रद्धापूर्वक 3 बार पाठ करें । पूजा के समय शांत मौन रहे एवं पीछे मूड़कर बिलकुल भी नहीं देखे । ऐसा लगातार 5 शुक्रवार तक करना हैं । कुछ ही दिनों में चमत्कार दिखाई देने लगेंगे ।

।। अथ श्री महालक्ष्मी चालीसा ।।
॥ दोह ॥
जय जय श्री महालक्ष्मी, करूँ माता तव ध्यान ।
सिद्ध काज मम किजिये, निज शिशु सेवक जान ।।
॥ चौपाई ॥
नमो महा लक्ष्मी जय माता, तेरो नाम जगत विख्याता ।।
आदि शक्ति हो माता भवानी, पूजत सब नर मुनि ज्ञानी ।।
जगत पालिनी सब सुख करनी, निज जनहित भण्डारण भरनी ।।
श्वेत कमल दल पर तव आसन, मात सुशोभित है पद्मासन । ।
श्वेताम्बर अरू श्वेता भूषणश्वेतही श्वेत सुसज्जित पुष्पन ।।
शीश छत्र अति रूप विशाला, गल सोहे मुक्तन की माला ।।
सुंदर सोहे कुंचित केशा, विमल नयन अरु अनुपम भेषा ।।
कमल नयन समभुज तव चारि, सुरनर मुनिजनहित सुखकारी ।।
अद्भूत छटा मात तव बानी, सकल विश्व की हो सुखखानी ।।
शांतिस्वभाव मृदुलतव भवानी, सकल विश्व की हो सुखखानी ।।

महालक्ष्मी धन्य हो माई, पंच तत्व में सृष्टि रचाई ।।
जीव चराचर तुम उपजाये, पशु पक्षी नर नारी बनाये ।।
क्षितितल अगणित वृक्ष जमाए, अमित रंग फल फूल सुहाए ।।
छवि विलोक सुरमुनि नर नारी, करे सदा तव जय जय कारी ।।
सुरपति और नरपति सब ध्यावें, तेरे सम्मुख शीश नवायें ।।
चारहु वेदन तब यश गाये, महिमा अगम पार नहीं पाये ।।
जापर करहु मात तुम दाया, सोइ जग में धन्य कहाया ।।
पल में राजाहि रंक बनाओ, रंक राव कर बिमल न लाओ ।।
जिन घर करहुं मात तुम बासा, उनका यश हो विश्व प्रकाशा ।।
जो ध्यावै से बहु सुख पावै, विमुख रहे जो दुख उठावै ।।

महालक्ष्मी जन सुख दाई, ध्याऊं तुमको शीश नवाई ।।
निज जन जानी मोहीं अपनाओ, सुख संपत्ति दे दुख नशाओ ।।
ॐ श्री श्री जयसुखकी खानी, रिद्धि सिद्धि देउ मात जनजानी ।।
ॐ ह्रीं- ॐ ह्रीं सब व्याधिहटाओ, जनउर विमल दृष्टिदर्शाओ ।।
ॐ क्लीं- ॐ क्लीं शत्रु क्षय कीजै, जनहीत मात अभय वर दीजै ।।
ॐ जयजयति जय जयजननी, सकल काज भक्तन के करनी ।।
ॐ नमो-नमो भवनिधि तारणी, तरणि भंवर से पार उतारिनी ।।
सुनहु मात यह विनय हमारी, पुरवहु आस करहु अबारी ।।
ऋणी दुखी जो तुमको ध्यावै, सो प्राणी सुख संपत्ति पावै ।।
रोग ग्रसित जो ध्यावै कोई, ताकि निर्मल काया होई ।।

विष्णु प्रिया जय जय महारानी, महिमा अमित ना जाय बखानी ।।
पुत्रहीन जो ध्यान लगावै, पाये सुत अतिहि हुलसावै ।।
त्राहि त्राहि शरणागत तेरी, करहु मात अब नेक न देरी ।।
आवहु मात विलंब ना कीजै, हृदय निवास भक्त वर दीजै ।।
जानूं जप तप का नहीं भेवा, पार करो अब भवनिधि वन खेवा ।।
विनवों बार बार कर जोरी, पुरण आशा करहु अब मोरी ।।
जानी दास मम संकट टारौ, सकल व्याधि से मोहिं उबारो ।।
जो तव सुरति रहै लव लाई, सो जग पावै सुयश बढ़ाई ।।
छायो यश तेरा संसारा, पावत शेष शम्भु नहिं पारा ।।
कमल निशदिन शरण तिहारि, करहु पूरण अभिलाष हमारी ।।

॥ दोहा ॥
महालक्ष्मी चालीसा, पढ़ै सुने चित्त लाय ।
ताहि पदारथ मिलै अब, कहै वेद यश गाय ।।
॥ इति श्री महालक्ष्मी चालीसा ॥
************


from Patrika : India's Leading Hindi News Portal https://ift.tt/2H5y3ES
via

No comments