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जेल ब्रेक की घटनाओं में देशभर में मध्य प्रदेश पहले नंबर पर

भोपाल। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के तहत प्रिजन स्टेटिस्टिक्स इंडिया (पीएसआई) की वर्ष 2016 की रिपोर्ट में मध्य प्रदेश को लेकर नया खुलासा हुआ है। जेल ब्रेक की घटनाओं में देशभर में मध्य प्रदेश सबसे आगे है। जेल से फरारी के मामलों में भी प्रदेश पहले नंबर पर है, जबकि त्रिपुरा दूसरे और तीसरे नंबर पर बिहार है।

इसके अलावा प्रदेश की जेलों में सबसे ज्यादा 18 से 30 वर्ष के युवा कैदी सजा काट रहे हैं। युवा कैदियों के सजा काटने के मामले में दूसरे नंबर पर उत्तर प्रदेश और तीसरे पायदान पर पंजाब है। एनसीआरबी की तरफ से शनिवार को जारी हुई प्रिजन स्टेटिस्टिक्स इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक मप्र की जेलों में सबसे ज्यादा फरारी के मामले आते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2016 में मप्र में चार बार जेल ब्रेक की घटनाएं हुईं। मप्र में हुई जेल फरारी की इन चारों घटनाओं में सबसे ज्यादा चर्चित जेल ब्रेक की सबसे बड़ी घटना राजधानी सेंट्रल जेल से हुई, जिसमें प्रतिबंधित संगठन सिमी के आठ आतंकी फरार हो गए थे। ये तस्वीर चौंकाने वाली है और साथ ही पुलिस व जेल प्रशासन पर सवाल उठाती है।

आतंकियों को हथियार कैसे मिले, खुलासा नहीं
राजधानी सेंट्रल जेल ब्रेक के बाद पुलिस मुठभेड़ में मारे गए सिमी आतंकियों के पास ड्रायफ्रूट और अवैध हथियार मिले थे। आशंका है कि यह अवैध हथियार बाहरी सामान के साथ अंदर भेजे गए। हालांकि घटना के बाद आज तक यह स्पष्ट नहीं हुआ कि अवैध हथियार किसने मुहैया कराए थे। न ही जेल ब्रेक और एनकाउंटर की जांच के लिए बनाए गए न्यायिक जांच आयोग ने रिपोर्ट में यह उल्लेख किया है कि अवैध हथियार जेल में कैसे पहुंचे।

 

रिपोर्ट उजागर कर रही लापरवाही की कहानी
- वर्ष 2016 में मप्र में जेल ब्रेक की चार घटनाएं हुईं, जबकि जेल में आठ बार फसाद हुआ। त्रिपुरा में जेल ब्रेक की तीन घटनाएं हुईं, जबकि बिहार में जेल ब्रेक की एक और 19 बार जेलों में विवाद और झगड़े हुए।
- वर्ष 2015 में मप्र की जेलों में फरारी एक भी नहीं, जबकि सात बार फसाद हुए। उप्र में जेल ब्रेक की फरारी सात बार और तीन बार झगड़े हुए। राजस्थान में फरारी एक हुई, जबकि 10 बार झगड़े हुए।
- वर्ष 2014 में मप्र में जेल ब्रेक एक बार हुआ, जबकि आठ बार फसाद और एक बार जेल के अंदर गोलीबारी भी हुई। उप्र में 6 बार फरारी हुई, जबकि दो बार झगड़े हुए। राजस्थान में जेलों के अंदर 33 बार मारपीट हुई।

 

सजा काट रहे कैदियों में 18 से 30 वर्ष के युवा सर्वाधिक:
- वर्ष 2016 में मप्र में 6816 युवा कैदी सजा काट रहे हैं। यह संख्या उप्र में 5711 और पंजाब में 3812 है।
- वर्ष 2015 में मप्र में 6608, उप्र में 5517 और पंजाब में 3832 थी।
- वर्ष 2014 में मप्र में 5673, उप्र में 5470 और पंजाब में यह संख्या 2981 थी।



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