कैंसर को मात देकर थामा पैडल और जीत लिया मेडल
भोपाल. भारतीय केनो टीम के खिलाड़ी राजू रावत उन लोगों के लिए प्रेरणा बनकर उभरे हैं जो कैंसर जैसी बीमारी से जूझ रहे हैं। राजू को तीन साल से बोन कैंसर था। लेकिन अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति और मजबूत इरादों की बदौलत उन्होंने न सिर्फ कैंसर जैसी बीमारी को हराकर भारतीय केनो टीम में वापसी की बल्कि रविवार को यहां बड़ी झील में जारी ओपन इंटरनेशनल केनो स्प्रिंट कॉम्पीटिशन के सी-2, 500 मीटर स्पर्धा में कांस्य पदक भी जीता है।
उत्तराखंड के राजू ने बताया कि मैं 2010 से 2015 तक भारतीय टीम का हिस्सा रहा। 2015 में एशियन चैंपियनशिप के दौरान मुझे बोन कैंसर हो गया। फिर एक साल तक दिल्ली के एक हॉस्पिटल में इलाज करवाया। हॉस्पिटल से डिस्चार्ज होने के बाद मेरी बॉडी में कहीं भी बाल नहीं थे। जिसके लिए आज भी मैं कीमोथैरेपी करवा रहा हूं।कई दिनों तक रहा आईसीयू में
उन्होंने बताया कि कैंसर से मेरा वजन बीस किलो कम हो गया था। आईसीयू में कई बार मरने की कगार पर रहा। जब उपचार करके गेम में आया तो एक किमी पैदल भी नहीं चल सकता था। मुझे लगता था कि गेम में कभी वापसी नहीं कर पाऊंगा। फिर मां और कोच ने हौसला बढ़ाया। उन्होंने मुझे हिम्मत दी और मैं प्रेक्टिस में जुट गया। आज 20-20 किलोमीटर तक पैडलिंग करता हूं।
बचपन में गुजर गए थे पिता
राजू को बचपन से ही पानी से लगाव रहा। रूड़की में पढ़ाई के दौरान उन्होंने इस खेल को देखा। फिर स्पोट्र्स हॉस्टल की टीम से खेलने लगे। आठ साल की उम्र में ही पिता का साया सर से उठ गया था।
भोपाल है लकी : यहीं पर जीता था पहला पदक
राजू को 2006 में भोपाल में ही पहला नेशनल खेलने का मौका मिला। जिसमें उन्होंने रजत पदक जीता। फिर 2011 में हंगरी वल्र्ड चैंपियनशिप में भारत का प्रतिनिधित्व किया। इसमें सेमीफाइनल तक पहुंचे। 2012 में ओपन इंटरनेशनल रेगेटा में दो कांस्य पदक जीते। 2014 एशियन गेम्स और 2015 एशियन चैंपियनशिप में भाग लिया।
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