परिस्थितियां लेती है मनुष्य की परीक्षा
भोपाल। शहीद भवन में सघन सोसायटी फॉर कल्चर एंड वेलफेयर द्वारा 'रंग त्रिवेणी नाट्य उत्सव-5' के दूसरे दिन गुरुवार को त्रिकर्षि नाट्य संस्था द्वारा नाटक 'निद्र्वन्द्व' का मंचन किया गया। नाटक का निर्देशन केजी त्रिवेदी द्वारा किया गया। नाटक में बताया कि कोई भी बुरा आदमी नहीं है।
परिस्थितियां थोड़ी-बहुत विषम होती हैं लेकिन वह मनुष्य की परीक्षा लेती है और अपनी परीक्षा सच्चाई और सच्चे मन के साथ देना और उसमें सफल रहने का संदेश देने की कोशिश की। नाटक के माध्यम से यह संदेश देने की कोशिश की गई कि इंसान को हर परिस्तिथि का डंटकर मुकाबला करना चाहिए। संघर्ष उसे तपाकर कुंदन बना देता है।
एक गांव में एक गरीब व्यक्ति नेकी जब सुबह काम पर जा रहा था तब मुखिया के पास उसने कई लोगों की भीड़ लगी देखी। वह देखता है कि एक-एक आदमी उठकर अपनी संख्या बोलता है और मुखिया उसे लिख लेता है। पास रहकर पता चलता है कि कल गांव में कुछ बौद्ध संतों के साथ कुछ भिक्षु गुजरेंगे और यह सभी लोग अपनी क्षमता अनुसार उन्हें भोजन करवाएंगे।
नेकी भी भोजन कराने का संकल्प लेकर अपनी मजदूरी पर निकलता है, फिर कड़ी मेहनत के बाद उत्साहपूर्वक घर आता है। वह संतों को भोजन कराने की सारी व्यवस्थाएं जुटा लेता है। अगले दिन जब वह अपने अतिथि लेने जाता है तब मुखिया कहता है कि तुम्हारे नाम के आगे तो कोई भी भिक्षुक का नाम नहीं लिखा। नेकी उदास हो जाता है और रोते हुए नेकी अपने घर चला जाता है।
संत खुद आते हैं भोजन करने
उदास नेकी भगवान का स्मरण करने लगता है। भगवान उसका भक्तिभाव देखकर प्रसन्न हो जाते हैं। एक तपस्वी संत को जब उसके मन की करुणा का पता चलता है तो वह खुद उसके घर भोजन करने पहुंच जाता है। उसकी नैतिकता, उदारता और गरीब होकर भी भी किए गए संकल्प को लेकर संवेदनशील होना ईश्वर के सच्चे भक्त होने का परिचय देता है। डायरेक्टर का कहना है कि नाटक के रिहर्सल के दौरान जब एक्टर ने इस प्ले की तैयारी की तो उनका जीवन भी पूरी तरह से बदल गया।
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