विदेश आक्रमणकारियों से बचाव के लिए शुरू हुए बाल विवाह, अब बन गया कुरीति
भोपाल। महिला दिवस की पूर्व संध्या पर गुरुवार को सामाजिक संगठनों द्वारा बाल विवाह के विरूद्ध एक पहल करते हुए स्वराज भवन में जागरूकता विमर्श आयोजित किया गया। स्पंदन संस्था के तत्वावधान में हुई इस संगोष्ठी में लगभग दर्जनभर से अधिक विषय विशषज्ञों ने कड़े स्वर बाल विवाह के विरुद्ध अपनी आवाज बुलंद करते हुए समाज में जनजागरूकता लाने का संकल्प भी लिया।
इस अवसर पर स्पंदन के डॉ. अनिल सौमित्र के साथ बीणा श्रीवास्तव, रितु शर्मा, डॉ. प्रतिभा चतुर्वेदी, उमाशंकर पटेल, गीत धीर, अभीताश, राजेश कुमार जायसवाल, हरीश बरैठीया ऋषि सिंह बघेल, डॉ. ऋतु यादव, सिद्धांत यादव और जितेश कुमार प्रमुख रूप से मौजूद रहे।
पुराणों में बाल विवाह का कोई उल्लेख नहीं
इस संगोष्ठी में अपने विचार रखते हुए ब्रम्हा कुमारी ईश्वरीय विवि से संबद्ध बहन बीके किरण ने बताया कि पुराणों में बाल विवाह का कोई उल्लेख नहीं है। विदेशी आक्रांताओं के कारण बाल विवाह शुरू हुआ।
कन्याओं को बचाने हेतु कालांतर में, ताकि कोई विदेशी उसकी अस्मत न लूटे, उसका अपहरण न करे। इसी कारण इसकी शुरूआत हुई। बाद में यह कुरीति में बदल गई जिसे अब नैतिक मूल्यों के ज्ञान और शिक्षा से समाप्त करना जरूरी हो गया है। जबकि बाल आयोग की सदस्य रहीं आर्य श्रद्धा ने बताया बाल विवाह की दर में लगातार कमी आ रही है।
कुपोषण की समस्या का मूल बाल विवाह
पेशे से वकील जीके छिब्बर ने कहा कानून से नहीं, सामाजिक जागरूकता से बाल विवाह खत्म होगा। यहीं डॉ. आरएच लता ने कहा बाल विवाह को रोकने के लिए अब सख्ती से कानून का पालन जरुरी है। राज्य स्वास्थ्य आयोग की डॉ. कनिका शर्मा ने कम उम्र में शादी के कारण होने वाले परेशानियों कि बात कही।
उन्होंने आकड़ों के हवाले से बताया कि कुपोषण जैसी गंभीर समस्या का मूल बाल विवाह ही है। इस संगोष्ठी में राजनैतिक दलों से संबद्ध महिला पैनलिस्ट भी शामिल हुईं। भाजपा से नेहा बग्गा ने कहा कि केंद्र की भाजपा सरकार बाल विवाह के विरुद्ध पूरी तरह मुस्तैद है। परिणामत: विगत कुछ सालों में बाल विवाह में कमी आई है। कांग्रेस प्रदेश प्रवक्ता संगीता शर्मा ने विश्वास जताया कि मप्र सरकार बाल विवाह के विरुद्ध सख्त कानून बनाएगी।
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