संबंधों के मानवीय पहलुओं को दिखाता है 'दूसरा अध्याय' - Web India Live

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संबंधों के मानवीय पहलुओं को दिखाता है 'दूसरा अध्याय'


भोपाल। कुक्कुट भवन में सोमवार को नाटक 'दूसरा अध्याय' का मंचन किया गया। नाटक का निर्देशन सरोज शर्मा ने किया है। नाटक की कहानी अजय शर्मा ने लिखी है। एक घंटे के इस नाटक में छह कलाकारों ने ऑनस्टेज अभिनय किया है। नाटक की कहानी रिश्तों के इर्द-गिर्द घूमती है। नाटक मानवीय संबंधों पर बेस्ड है। नाटक का यह पहला मंचन था।
नाटक का पात्र अभय एक फैके में बैठा रहता है। वह सोचता है कि आखिर ऐसा क्यों हुआ कि उसका और नीरजा का रिश्ता अपने मुकाम पर नहीं पहुंच पाया। तभी कहानी फ्लैश बैक में जाती है। यहां अभय, नीरजा के साथ एक ट्रेनिंग कैंप से होती है। दो अलग-अलग कंपनियों में काम करने वाले अभय और नीरजा की पहली बार यही होती है। अभय और नीरजा के बीच कुछ संबंध बनते हैं। ट्रेनिंग के बाद दोनों चले आते हैं और ऑफिस में ब्रेक के समय एक कैफे में मिलते हैं। अभय को जीवन साथी की तलाश है, जबकि नीरजा शादी-शुदा है। अभय नीरजा के सामने शादी का प्रस्ताव रखता है। वह कहता है कि तुम्हारे प्रेम ने मेरी रूह को छुआ है। नीरजा पहले तो कशमकश में पड़ जाती है कि वह कैसे अपने पति को छोड़ेगी। आखिरकार वह पति को छोडऩे का फैसला कर लेती है।
पति को आ जाता है पैरालिसिस का अटैक
वह जैसे ही अपने पति को अपने रिश्तों के बारे में बताते हुए छोडऩे की बात करती है। उसके पति को पैरालिसिस अटैक आ जाता है। तभी नीरजा फैसला लेती है कि वह ऐसे समय में पति का साथ देगी। वह अभय को साथ जाने से मना कर देती है। नाटक के अंत में दिखाया जाता है कि अभय एक कंपनी में बहुत बड़े पद पर है और अचानक एक कार्यक्रम में उसकी मुलाकात नीरजा से होती है। वह नीरजा से साथ चलने का कहता है लेकिन नीरजा कहती है नहीं अभय, अब सब खत्म हो गया है। मेरे पति की भी मृत्यु हो चुकी है, तुम अपने रास्ते पर आगे बढ़ो।


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