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बोरवेल से लेकर नगर निगम की जलापूर्ति लाइन के पानी में मिले हानिकारण कीटाणु

भोपाल. राजधानी के कई क्षेत्रों में कीटाणुयुक्त पानी पहुंच रहा है। एक अशासकीय संगठन द्वारा शहर के अलग-अलग क्षेत्रों में बोरवेल से लेकर नगर निगम के जलापूर्ति सिस्टम से घरों में पहुंच रहे पानी की जांच में ये तथ्य सामने आए हैं। 25 पॉइंट्स पर की गई जांच में से छह में कीटाणुयुक्त पानी निकला है। यानी इसमें अपशिष्ट के अंश हैं और इसका पेयजल में तो बिल्कुल उपयोग नहीं किया जाना चाहिए। हैरानी ये है कि इसमें निगम की जलापूर्ति लाइन से घर पहुंच रहा पानी भी शामिल है। आशंका है कि ये लाइन किसी सीवेज या नाले से होकर गुजर रही हो, उसमें लीकेज हो, जिससे कीटाणयुक्त पानी सप्लाई हो रहा है।
ये है चिंता की बात
नगर निगम अपने जलापूर्ति सिस्टम से शुद्ध पानी जारी करने का दावा करता है, लेकिन ये घर तक पहुंचने पर अशुद्ध हो जाता है। इसके साथ ही बोरिंग से निकले भू-जल में बैक्टीरिया की उपस्थिति बता रही है कि जमीन के अंदर तक सीवेज या इसी तरह की गंदगी उतर रही है। जांच अभी जारी है। संस्था रिपोर्ट को नगर निगम समेत नगरीय प्रशासन को सौंपेगी ताकि इस दिशा में सार्थक कार्रवाई की जा सके।
इन पॉइंट्स पर पानी मिला प्रदूषित
पिपलानी क्षेत्र चांदबाड़ी में अग्रवाल सेंटर के सामने लगे बोरवेल में बैक्टीरिया मिले। यहां पानी में टीडीएस तय मानक से 750 निकली। ये 300 से 500 मिग्रा प्रति लीटर होनी चाहिए।
आनंद नगर से लगे 100 क्वार्टर क्षेत्र में जगेश्वर के मकान के सामने स्थित बोरवेल में बैक्टिरिया मिले। पीएच स्तर 9 निकला।
दौलतपुरा कॉलोनी क्षेत्र में निगम की जलापूर्ति लाइन में बैक्टीरिया निकला। जलीय क्षारीयता 500 मिग्रा की बजाय 800 मिली।
जाटखेड़ी में निगम की जलापूर्ति लाइन के नल में बैक्टीरिया मिले। क्षारीयता 600 मिलीग्राम थी। कठोरता भी तय मानक से अधिक 640 मिग्रा. प्रतिलीटर मिली।
100 क्वार्टर क्षेत्र में निगम की जलापूर्ति लाइन बैक्टीरिया मिले।

इसलिए ये हालात
निगम करोड़ों रुपए के प्रोजेक्ट से घरों पर पानी पहुंचाने का दावा करता है, लेकिन उसके पूरे तंत्र में पेयजल गुणवत्ता जांच कहीं नहीं है।
ये हैं जांच का सिस्टम
नगरीय प्रशासन विभाग के नियमों के अनुसार पूरे साल में निकाय को प्रति तीन या चार माह में क्षेत्रवार पानी की गुणवत्ता जांचना जरूरी है। फिलहाल गंदे पानी की जांच के लिए शिकायतकर्ता को निगम कार्यालय या पीएचई की लैब जाना पड़ता है। इसके बाद नगर निगम का जलकार्य विभाग कार्रवाई करता है।
ऐसे की जांच: संस्था आरंभ ने विशेष जांच अभियान वाटर एड संस्था के साथ चलाया है। इसके लिए दिल्ली से दस जांच किट मंगवाई हैं। अभियान की अंतिम रिपोर्ट अभी आना बाकी है। जांच के दौरान पानी को 13 बिंदुओं पर जांचा जा रहा है।



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