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हाईकोर्ट के निर्देश: यूनिहोम्स मामले की जांच सीबीआई करेगी, तीन माह में मांगी रिपोर्ट

कोलार चूनाभटटी क्षेत्र में लगभग 50 एकड़ भूमि पर प्रस्तावित आवासीय कम व्यावसायिक टाउनशिप में ग्राहकों के साथ धोखाधड़ी के दर्ज मामलों की जांच अब सीबीआई करेगी। यूनिहोम्स रहवासी वेलफेयर एसोसियेशन की याचिका पर हाईकोर्ट ने शुक्रवार को ये अंतिम आदेश पारित किया। तीन माह में जांच कर रिपोर्ट कोर्ट में प्रस्तुत करना होगी।

कोलार थाने में विभिन्न धाराओं में दर्ज प्रकरण में पुलिस कोई कार्रवाई नहीं कर रही थी। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने जांच एजेंसी पर नाराजगी जताई। कहा कि बिल्डर द्वारा करीब 500 परिवारों की 200 करोड़ रुपए से अधिक की राशि हड़प ली गई, जिस पर पुलिस ने संतोषजनक जांच नहीं की। मामले में पुलिस ने खात्मा लगाने की बात की थी। इस पर कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए जांच सीबीआई को सुपुर्द कर दी। प्रति ग्राहक करीब 21 से 35 लाख रुपए यूनिहोम्स कोलाज ग्रुप जमा करा चुका है।

यूनिहोम्स कोलाज ग्रुप की कंपनियों एवं उनके संचालकों के खिलाफ नवम्बर 2017 में कई आपराधिक प्रकरण एवं एफ.आईआर दर्ज की गई थी। कोर्ट में बताया गया कि एफआइआर के बावजूद कोलार पुलिस थाने की ओर से कोई भी कार्रवाई नहीं की गई। किसी भी संचालकगण को कभी पूछताछ के लिए नहीं बुलाया। याचिका में यह कहा गया कि जांच एजेंसी खुले तौर पर यूनिहोम्स एवं अन्य कंपनियों के संचालकों को संरक्षण दे रही है। आवेदक रहवासी एसोसिएशन की ओर से अधिवक्ता सिद्धार्थ राधेलाल गुप्ता और अमित गर्ग ने पैरवी की।
यह है मामला

यूनिहोम्स कोलाज ग्रुप निजी कंपनियों का समूह है। इसमें शामिल खनेजा प्रॉपर्टीज लिमिटेड, एसवीएस बिल्डकोन लिमिटेड आदि द्वारा 50 एकड़ से अधिक भूमि पर वर्ष 2011 में एक आवासीय कम वाणिज्यिक टाउनशिप बनाना तय किया था। जिसके अंतर्गत यूनिहोम्स नामक रहवासी कॉलोनी एवं ग्रेट इंडिया पैलेस नामक शॉपिंग मॉल का निर्माण किया जाना था।

इसके संबंध में दोनों कंपनियों द्वारा बाकायदा ब्रोशर जारी कर 500 से अधिक ग्राहकों से निर्माण राशि प्राप्त कर ली गई। सभी के साथ विक्रय अनुबंध पत्र भी निष्पादित कर लिए गए। इन ग्राहकों में आवासीय फ्लेट्स व शॉपिंग मॉल के ग्राहक शामिल थे। इन्होंने लगभग 90 प्रतिशत राशि यूनिहोम्स कोलाज ग्रुप को भुगतान कर दी। कंपनियों ने यहां की जमीन बैंकों में गिरवी रख लगभग 300 करोड़ रुपए का लोन ले लिया ।

जो 25 प्रतिशत प्लॉट नगर निगम भोपाल में गिरवी रखे गये थे, उनको भी मुक्त कर बैंकों में गिरवी रख दिए गए। इसके अलावा बिल्डर कंपनियों द्वारा ग्राहकों से 90 प्रतिशत राशि लेने के बाद भी 6-7 वर्ष तक किसी भी तरह का कोई निर्माण कराकर नहीं दिया गया, जिसके संबंध में भी कई आपराधिक प्रकरण उनके विरूद्ध दर्ज हुये। अब सीबीआई इन्हीं की जांच करेगी।



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