Election 2019: MP की इस सीट पर 40 साल बाद भाजपा के दांव पर भारी पड़ी कांग्रेस!
भोपाल. कांग्रेस भोपाल लोकसभा सीट से पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह को चुनाव लड़ाकर भाजपा को उसी के दांव से शिकस्त देने की कोशिश में है। कभी कांग्रेस की परंपरागत सीट रही भोपाल को हथियाने के लिए जनसंघ ने 1967 में बाहरी प्रत्याशी पर दांव खेला था। कर्नाटक के दिग्गज नेता जगन्नाथ राव जोशी को तत्कालीन कांग्रेस सांसद मेमूना सुल्तान के मुकाबले उतारा था।
जोशी बड़े अंतर से जीते थे। भोपाल से 1985 में केएन प्रधान कांग्रेस के आखिरी सांसद रहे हैं। उनको 1989 में भाजपा के सुशीलचंद्र वर्मा ने हराया था। प्रधान के पहले पूर्व राष्ट्रपति शंकरदयाल शर्मा यहां से सांसद रहे हैं। जगन्नाथ राव जोशी को हराने के लिए कांग्रेस ने बाहरी उम्मीदवार शंकरदयाल शर्मा को मैदान में उतारा। शंकरदयाल शर्मा ये चुनाव जीत गए। उसके बाद भारतीय लोकदल के आरिफ बेग ने शर्मा को हराया तो अगले चुनाव में शर्मा ने हार का बदला ले लिया।
भोपाल का सियासी समीकरण
भोपाल का ताजा सियासी समीकरण देखें तो इस सीट पर कांग्रेस की जीत असंभव नहीं है। पिछले लोकसभा चुनाव में भाजपा के आलोक संजर ने कांग्रेस के पीसी शर्मा को 3.70 लाख मतों से हराया विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने इस खाई को बहुत हद तक पाट दिया है।
भाजपा सिर्फ 63 हजार की बढ़त बनाए हुए है। इस सीट पर कुछ फैक्टर दिग्विजय सिंह की जीत को मुमकिन बना सकते हैं। भोपाल में अब कांग्रेस के तीन विधायक हैं, जिनमें से आरिफ अकील और पीसी शर्मा मंत्री हैं। दिग्विजय सिंह के पास बड़ी संख्या में कार्यकर्ता हैं। साथ ही पांच लाख मुस्लिम मतदाता भी यहां निर्णायक माने जा सकते हैं। ये कांग्रेस का परंपरागत वोट बैंक माना जा सकता है।
भोपाल के अब तक के सांसद
वर्ष प्रत्याशी पार्टी
1952 सईदुल्लाह रजमी कांग्रेस
1957 मेमूना सुल्तान कांग्रेस
1962 मेमूना सुल्तान कांग्रेस
1967 जगन्नाथ राव जोशी जनसंघ
1971 शंकरदयाल शर्मा कांग्रेस
1977 आरिफ बेग भारतीय लोकदल
1980 शंकरदयाल शर्मा कांग्रेस
1985 केएन प्रधान कांग्रेस
1989 सुशीलचंद्र वर्मा भाजपा
1991 सुशीलचंद्र वर्मा भाजपा
1996 सुशीलचंद्र वर्मा भाजपा
1998 सुशीलचंद्र वर्मा भाजपा
1999 उमा भारती भाजपा
2004 कैलाश जोशी भाजपा
2009 कैलाश जोशी भाजपा
2014 आलोक संजर भाजपा
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