Lok Sabha polls 2019: शहर के प्रबुद्धजन ने बताया, क्या हैं जनता के मद्दे
भोपाल, लोकसभा चुनाव में राफेल, आतंकवाद और सर्जिकल स्ट्राइक जैसे मुद्दों के साथ मासिक और वार्षिक आय के वायदे जमकर उछल रहे हैं। सरकार और विपक्ष इन्हीं मुद्दों को सामने रख वोट मांग रहे हैं। नेताओं की बातों में स्थानीय मुद्दे नदारद हैं। पत्रिका ने जब शहर के प्रबुद्धजन से पूछा कि लोकसभा चुनावों में शहर विकास का एजेंडा क्या होना चाहिए तो सबका कहना था कि राष्ट्रीय नहीं स्थानीय मुद्दों से ही शहर का विकास संभव है।
लोगों का कहना है कि शहर के लिए राफेल, आतंकवाद जैसे मुद्दों की बजाय शहर का मास्टरप्लान, स्वास्थ्य सुविधाएं, सबको गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, पेयजल, अच्छी सडक़ें, बेहतर परिवहन, बड़ा तालाब का संरक्षण जैसे मुद्दे ज्यादा जरूरी हैं। राजनीतिक दलों को हर सीट के अनुसार अपना घोषणापत्र बनाना चाहिए। एक ही घोषणापत्र पूरे देश पर नहीं थोपा जाना चाहिए।
ये प्रमुख एजेंडे आए सामने
- सभी पार्टियां स्थानीय जरूरतों के अनुसार अपना घोषणापत्र जारी करें। इसे लीगल डॉक्यूमेंट बनाएं।
- सभी दलों को चुनाव में स्थानीय व्यक्ति को ही उतारना चाहिए, क्योंकि वो ही यहां की नब्ज को समझता है, बाहरी व्यक्ति तो जीतने या हारने के बाद पलटकर देखता नहीं
- सब्सिडी और मुफ्त राशन, पानी, बिजली देने की प्रवृत्ति बंद होनी चाहिए।
- शहर का मास्टर प्लान लागू किया जाए।
- बेरोजगारी हर शहर की बड़ी समस्या है, इसके लिए ठोस प्लानिंग की जरूरत है। शिक्षा को रोजगारपरक बनाना होगा और नए-पुराने हर क्षेत्र में रोजगार के अवसर पैदा करें।
- शहर का पर्यावरण, तालाब और हरियाली बचाने के लिए ठोस प्लान बने, बड़े तालाब के साथ अन्य तालाबों के संरक्षण की पुख्ता व्यवस्था हो।
- शिक्षा के क्षेत्र में व्यापक बदलाव हो, कोर्स को आज की जरूरतों के आधार पर बनाएं।
- आम मरीजों के लिए एम्स और बीएचएमआरसी का विलय जरूरी, पार्टियां इसे घोषणापत्र में शामिल करें
मंडियों को बिचौलियों से मुक्त करें और शहर में वेयरहाउस का निर्माण हो ताकि किसानों को राहत मिले
किसानों को प्रोत्साहित करने शहर के चारों कोनों पर फूड प्रोसेसिंग यूनिट बनाई जाएं। - 72 सोसायटियों में अब भी नर्मदा जल नहीं मिल रहा, यह सबसे लिए उपलब्ध हो, इसके लिए व्यक्तिगत कनेक्शन देने की व्यवस्था हो
- शहर में पार्र्किं ग व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने की बात हो और पर काम किया जाए
किसने क्या कहा
वही घोषणाएं करनी चाहिएं जो वह पूरी कर सके। नाम उसी का होता है जो काम करता है। बुच साहब ने काम किया आज भी लोग उन्हें याद करते हैं।
संतोष अग्रवाल, अध्यक्ष, भोपाल स्टॉक इंवेस्टर्स एसोसिएशन
यह राजधानी की दुर्दशा है कि स्वच्छता रैंकिंग में 19वें स्थान पर पहुंच गए। जो शहर के लिए काम कर सके ऐसा प्रतिनिधी हो।
अजय श्रीवास्तव, सचिव, अभा कायस्थ महासभा
शहर में कानून व्यवस्था की बात होनी चाहिए। कोई इसके बारे में बात नहीं करता। हर शहर की जरूरतें अलग हैं ऐसे में मुद्दे भी अलग होना चाहिए।
विनय श्रीवास्तव, एडवोकेट
2005 के बाद शहर का कोई मास्टर प्लान नहीं बना। बेतरतीब विकास हो रहा है। मास्टर प्लान लागू करें।
सुरेन्द्र तिवारी, सदस्य, भोपाल सीनियर सिटीजन फोरम
शहर के लिए क्वालिटी एजुकेशन बहुत जरूरी है। स्कूल कॉलेजों के लिए सख्त गाइडलाइन-मॉनीटरिंग हो।
डॉ.़ आनंद शर्मा, महासचिव, प्राध्यापक संघ कांग्रेस
घोषणा पत्रों को लीगल डॉक्युमेंट के रूप में माना जाना चाहिए। वायदों पर खरा नहीं उतरे तो उसे बैन कर दें।
मनोज पांडे, यूनिसेफ में मप्र के प्रतिनिधि
शहर के आसपास फूड प्रोसेसिंग प्लांट हो ताकि किसान अपनी फसलों को आसानी से बेच सकें। किसानों को उनकी फसल का सही दाम मिले।
कपिल पाटीदार, किसान मिसरोद
शहर का पर्यावरण भी चुनावों का प्रमुख मुद्दा होना चाहिए। कलियासोत और केरवा जैसी संपदा को बचाने की बात भी होना चाहिए।
राशिद नूर खान, अध्यक्ष, यूथ कांग्रेस मध्य विधानसभा
कृषि को बढ़ावा देने के उपाय किए जाएं। यह देश में आज भी सबसे अधिक रोजगार देने वाला सेक्टर हो सकता है। सब्सिडी देने के निर्णयों पर पुन: विचार करें।
हृदयानंदराव, सेवानिवृत्त कर्मचारी
भोपाल का सबसे बड़ा दुर्भाग्य इसके मास्टर प्लान का न होना है। सांसद कोई भी हो,
उसकी प्राथमिकता इसे लागू करवाना हो।
सुनील उपाध्याय, अध्यक्ष, न्यू कॉलोनी वेलफेयर एसोसिएशन
देश में छोटी इंडस्ट्री को बढ़ाने के उपाय किए जाएं। जब तब देश में छोटी इंडस्ट्री नहीं बढ़ेगी देश तरक्की नहीं कर पाएगा।
रमेश चंद्र मिश्र, समाजसेवी
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