जांच में पकड़ा गया 1230 किलो पनीर, 350 किलो नकली मावा - Web India Live

Breaking News

जांच में पकड़ा गया 1230 किलो पनीर, 350 किलो नकली मावा


भोपाल. गुनगा थाना पुलिस ने आचार संहिता के दौरान की जा रही जांच में 1230 किलो अमानक पनीर, 350 किलो मावा की खेप पकड़ी है। बाजार में इस माल की कीमत कारीब पांच लाख रुपए बताई जा रही है। रोजाना इसी तरह से माल ग्वालियर से लाकर भोपाल में खपाया जा रहा था। इस माल की बिक्री ज्यादातर शहर के पॉश क्षेत्र की डेरियों में की जाती थी। कभी-कभी माल पुराने शहर में भी खपाया जा रहा था। पनीर और मावा के आठ सेम्पल लेकर जांच के लिए भेजे हैं। इसमें ट्रांसपोर्टर, दलाल की मिलीभगत भी उजागर हुई है। दलाल विज आनंद उर्फ पर पहले भी दो लाख रुपए का जुर्माना किया जा चुका है।
अचार संहिता के बाद शहर के बाहर से आने वाले वाहनों की जांच लगातार जारी है। इसी बीच गुनगा थाने की पुलिस को सूचना मिली कि ग्वालियर के मोर बाजार से अमानक पनीर और मावा की खेप ट्रक नंबर एमपी-07 जीए 6449 से भोपाल लाई जा रही है। ये खेप हर दूसरे दिन भोपाल आती है और यहां की फिक्स डेरियों पर इसकी सप्लाई होती है। बुधवार सुबह साढ़े आठ बजे तय समय ट्रक ईंटखेड़ी स्थित दुपाडिय़ा जांच नाके के पास पहुंचा तो थाना प्रभारी डीके सिंह व अन्य पुलिसकर्मियों ने घेराबंदी कर रोक लिया। ट्रक में पीछे देखने पर उसमें मावा और पनीर था।
जांच के लिए मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी डीके वर्मा को बुलाया गया। जांच में पता चला कि इस तरह की खेप इन दिनों हर दो दिन में एक बार लाई जा रही थी। शादी और त्योहार पर ये रोजाना आती है। इसकी डेरियां भी फिक्स हैं। इस संबंध में खाद्य सुरक्षा विभाग की तरफ से प्रकरण कायम कर लिया गया है। जिसमें लोचन सिंह, ट्रांसपोर्टर प्रमोद शर्मा और दलाल विजय आनंद उर्फ बंटी को आरोपी बनाया गया है। डेरियों की इसमें क्या भूमिका है, इसकी जांच भी शुरू कर दी गई है। इस तरह के पनीर और मावे से बने खाद्य पदार्थों से किडनी व लिवर पर असर पड़ता है। संक्रमण पैदा कर सकता है। इसके साथ ही सिर दर्द, पेट दर्द व त्वचा रोग हो सकते हैं। पेट खराब होने वा आंतों में संक्रमण होने की भी संभावना बनी रहती है।

ऐसे बनता है नकली मावा और पनीर
मिलावटखोर मावा बनाने के लिए दूध पावडर, रसायन, आलू, शकरकंदी, रिफाइंड तेल का प्रयोग करते हैं। ङ्क्षसथेटिक दूध बनाने के लिए पानी में डिटर्जेट पाउडर, तरल जैल, चिकनाहट लाने के लिए रिफाइंड और एसेंट पाउडर डालकर दूध को बनाते हैं। यूरिया का घोल व उसमें पाउडर व मोबिल डालकर भी ङ्क्षसथेटिक दूध तैयार किया जाता है। इसमें थोड़ा असली दूध मिलाकर सोखता कागज डाला जाता है। इससे बड़े पैमाने पर नकली मावा व पनीर भी तैयार किया जाता है।

पहनी नजर में पनीर और मावा नकली है। इनके सेम्पल लेकर जांच के लिए भेजे गए हैं। प्रकरण कायम कर लिया है, जल्द की कोर्ट में प्रस्तुत किया जाएगा।
डीके वर्मा, मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी


from Patrika : India's Leading Hindi News Portal https://ift.tt/2UuPDbU
via

No comments