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सत्ता की गारंटी नहीं ज्यादा वोट प्रतिशत, आठ में से चार बार बनी कम मत पाने वाली पार्टी की सरकार

भोपाल . लोकसभा चुनाव अपने पूरे जोर पर है। हर राजनीतिक दल की कोशिश ज्यादा से ज्यादा वोट हासिल करने की है ताकि वो दिल्ली की कुर्सी के नजदीक पहुंच सके। लेकिन चुनाव का इतिहास कुछ और ही बात बताता है।

लोकसभा चुनाव का रिकॉर्ड देखें तो ज्यादा वोट प्रतिशत हासिल करना सरकार बनाने की गारंटी नहीं माना जा सकता। पिछले आठ चुनाव में से चार बार उस पार्टी की सरकार बनी है जिसको कम वोट हासिल हुए थे जबकि ज्यादा वोट पाने वाली पार्टी विपक्ष की कुर्सी पर बैठी रही क्योंकि उनकी सीटें बहुमत का आंकड़ा नहीं छू पाईं।

 

 

 

1989 से 2014 तक हुए लोकसभा चुनाव में 1989,1996,1998,1999 में कम वोट प्रतिशत पाने वाली पार्टियों की सरकार बनी। 1989 में 39 प्रतिशत वोट पाने वाली कांग्रेस सरकार नहीं बना सकी जबकि 2014 में 31 फीसदी वोटों के साथ भाजपा ने पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई।

मध्यप्रदेश के हाल के विधानसभा चुनाव में भी कुछ इसी तरह के आंकड़े नजर आए। कांग्रेस से 0.1 फीसदी ज्यादा वोट पाने वाली भाजपा 109 सीटों के साथ विपक्ष में बैठी हुई है। यहां पर वोटिंग ट्रेंड ने राजनीतिक दलों को गच्चा दे दिया और उनके अनुमान से उलट सरकार बना दी।

 

 

 

 

ये हैं पिछले चुनाव के आंकड़े :

- वोट कांग्रेस को,सरकार जनता दल की :
1989 के चुनाव में कांग्रेस को 39.5 प्रतिशत वोट मिले थे और 197 सीटों पर जीत हासिल हुई थी। लेकिन इसके बाद भी कांग्रेस केंद्र में सरकार नहीं बना पाई। सिर्फ 17.8 प्रतिशत वोट हासिल करने वाली जनता दल के नेतृत्व में सरकार बनी। वीपी सिंह देश के प्रधानमंत्री बने।

वोट भाजपा को,सरकार जनता दल की :
- 1996 में 8 फीसदी वोट हासिल करने वाली जनता दल की अगुवाई में संयुक्त मोर्चे की सरकार बनी। प्रधानमंत्री की कुर्सी एचडी देवगौड़ा को मिली। 20 प्रतिशत वोट हासिल करने वाली भारतीय जनता पार्टी की सरकार 13 दिन में ही गिर गई। प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी बहुमत साबित करने में नाकाम साबित हुए।

 

 

 

वोट कांग्रेस को, सरकार भाजपा की :
- 1998 में भाजपा का वोट प्रतिशत 25.59 रहा और उसको 182 सीटें हासिल हुईं। अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में भाजपा ने गठबंधन सरकार बनाई। कांग्रेस को इस बार भी भाजपा से ज्यादा वोट मिले। कांग्रेस का वोट प्रतिशत २६.१४ फीसदी रहा लेकिन उसे 141 सीटें ही मिल सकीं और कांग्रेस सरकार नहीं बना पाई। इस बार वाजपेयी सरकार 13 महीने चली।

 

 

वोट कांग्रेस को, सरकार भाजपा की :
- 1999 में भाजपा को 23.75 वोट प्रतिशत के साथ फिर से 182 सीटें प्राप्त हुईं। इस बार कांग्रेस को भाजपा से 4 प्रतिशत ज्यादा यानी 28.30 फीसदी वोट हासिल हुए लेकिन सीटें 114 ही मिल पाईं। भाजपा ने तीसरी बार अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में तीसरी बार गठबंधन सरकार बनाई।

 

इन चुनावों में बनीं ज्यादा वोट पाने वाली पार्टी की सरकार :

2004 : इन लोकसभा चुनाव में 26.70 वोट के साथ कांग्रेस को 145 सीटें मिलीं। कांग्रेस ने मनमोहन सिंह के नेतृत्व में गठबंधन सरकार बनाई। भाजपा को 22.16 प्रतिशत वोट के साथ 138 सीटें मिलीं।


2009 : इस बार चुनाव में कांग्रेस को 28.55 प्रतिशत वोट मिले और सीटें 206 पर पहुंच गईं। कांग्रेस को पिछले चुनाव के मुकाबले वोट प्रतिशत और सीटों दोनों का फायदा हुआ। मनमोहन सिंह के नेतृत्व में कांग्रेस ने फिर गठबंधन सरकार बनाई। भाजपा को 18.8 फीसदी वोटों के साथ 116 सीटें हासिल हुईं।

 

2014 : ये नरेंद्र मोदी का दौर था। मोदी की अगुवाई में भाजपा ने 31.34 फीसदी वोट के साथ 282 सीट हासिल कीं। नरेंद्र मोदी ने भाजपा को पूर्ण बहुमत दिलाने का करिश्मा किया और देश के प्रधानमंत्री बने। कांग्रेस को 19.52 फीसदी वोट और सिर्फ 44 सीटें हासिल हुईं। ये कांग्रेस का अब तक के इतिहास का सबसे बुरा दौर रहा।

 

 

 

 

इस बार कांग्रेस बहुत अच्छी स्थिति में हैं, वोट प्रतिशत भी कांग्रेस को मिलेगा और सबसे ज्यादा सीटें भी आएंगी। भाजपा को पूरे देश में 160 से ज्यादा सीटें नहीं मिलेंगी।

- कमलनाथ मुख्यमंत्री

 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समर्थन में सारा हिंदोस्तान खड़ा है, जिस तरह सूरज का पुन: उदय होना तय है वैसे ही उनका फिर से प्रधानमंत्री बनना तय है।

- शिवराज सिंह चौहान पूर्व मुख्यमंत्री



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