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सूखा बड़ा ताल, दिखने लगी सरकारी एजेंसियों की लापरवाही

भोपाल. सेप्ट यूनिवर्सिटी अहमदाबाद की चार सदस्यीय टीम ने पिछले दिनों भोपाल आकर भौगोलिक सर्वे शुरू किया। सर्वे में बड़ा तालाब संरक्षण, मेट्रो टे्रन, स्मार्ट सिटी के लिए जमीन उपलब्ध कराने, पार्र्किंग और पुराने शहर को सहेजने जैसे प्रमुख मुद्दे बिंदुओं को शामिल किया है। इसके अलावा तालाब कैचमेंट के नए नियम, औद्योगिकीकरण के नए क्षेत्र और रहवासी क्षेत्रों में अस्पताल संचालित करने जैसे विषयों पर भी सेप्ट प्रदेश सरकार को अनुशंसाएं करेगा। गौरतलब है कि प्रदेश सरकार ने सेप्ट यूनिवर्सिटी से मार्च में तकनीक और जानकारी साझा करने के लिए अनुबंध किया था। इसी के तहत सेप्ट टीएंडसीपी को मास्टर प्लान का प्रारूप तैयार करने में तकनीकी सहायता प्रदान कर रही है।

भोजताल निवेश क्षेत्र
बड़ा तालाब का आकार 3200 हेक्टेयर में सिमटने के बाद सरकार संरक्षण के मुद्दे पर जागी है। शहर के मास्टर प्लान की तर्ज पर तालाब का प्लानिंग एरिया बनाने का फैसला हुआ है, जिसे भोजताल निवेश क्षेत्र कहा जाएगा। नए प्लानिंग एरिया में भोपाल और सीहोर के 100 गांवों को कैचमेंट एरिया में शामिल किया गया है।


गैर प्रदूषणकारी उद्योग
अब कृषि जमीन पर उद्योग लगाने मंजूरी नहीं लेनी होगी। इस सूची में एयर कंडीशनर एवं कूलर रिपेयरिंग उद्योग, नॉन मोटराइज्ड एवं साइकिल असेंबलिंग, हाइड्रोलिक प्रेस से कागज का विनिष्टिकरण करना, बायो उर्वरक तैयार करना, बिस्किट और अंडा रखने के ट्रे बनाने का काम और फाउंटेन पैन बनाने सहित 744 उद्योग शामिल हैं।

रहवासी क्षेत्र में अस्पताल
मास्टर प्लान के नए मसौदे को लागू करने के बहाने पुराने नर्सिंग होम को रियायत देने की तैयरी एक बार फिर चर्चा में है। नए मसौदे पर सुनवाई के लिए बनी जिला सलाहकार समिति ने जो अनुशंसाएं संचालक टाउन एंड कंट्री प्लानिंग को भेजी हैं, उनके आधार पर ओल्ड स्ट्रक्चर को कंपाउडिंग और पार्र्किंग के नियमों में राहत दी जा सकती है।


नए इलाके शामिल
शहर के आउटर सर्किल में निजी आवासीय एवं व्यवासयिक प्रोजेक्ट्स से बने छोटे उपनगरीय क्षेत्रों को 12 साल बाद मूलभूत सुविधाएं मिलने का रास्ता साफ हो गया है। मास्टर प्लान-2005 के संशोधन मसौदे में इन इलाकों को शामिल किया जा रहा है। इसके बाद शहर के आउटर सर्किल में डवलपमेंट के नियम भी सरल हो जाएंगे।

 

मास्टर प्लान संशोधन के लिए सेप्ट अहमदाबाद की टीम ने शहर का दौरा किया है। प्रमुख मामलों में शासन की मंजूरी के बाद नियमों के प्रकाशन की कार्रवाई की जाएगी।
राहुल जैन, संचालक, टीएंडसीपी



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