प्रेगनेंसी में महिलाएं भूल कर भी न खाएं ये चीजें, हो सकता है किन्नर का जन्म
भोपाल। मध्य प्रदेश विभिन्न प्रकार की विविधताओं से भरा हुआ प्रदेश है। यहां पर कई प्रकार की संस्कृति और परम्पराएं हैं। वैसे तो कई त्यौहार में भी लोगों के द्वारा दक्षिणा देने की प्रथा है लेकिन कई बार किन्नर स्वयं से ही आपसे दक्षिणा मांगने के लिए आ जाते है। किन्नर समुदाय दक्षिणा लेने में सबसे आगे रहते हैं। यह सिर्फ त्यौहार ही नहीं बल्कि यदि किसी के यहां शादी होती हैं, या कोई शुभ काम हो या छोटा बच्चा पैदा होता हैं या नया मकान बनता हैं तो तब भी ये किन्नर वहां तत्काल आ जाते हैं और अपने हिसाब से जश्न मानते है। ये बात तो हुई किन्नर की लेकिन क्या आप जानते हैं कि किन्नर का जन्म कैसे होता है.....
ऐसे होता है किन्नर का जन्म
आपको बता दें कि गर्भावस्था के पहले तीन महीने के दौरान ही बच्चे का विकास शुरू होता है और ऐसे में इस दौरान ही किसी तरह के चोट, विषाक्त खान-पान या फिर हॉर्मोनल प्रॉब्लम की वजह से बच्चे में स्त्री या पुरूष के बजाय दोनों ही लिंगों के ऑर्गन्स और गुण आ जाते हैं। इसलिये गर्भावस्था के शुरुआत के तीन महीने बहुत ही ध्यान देने वाले होते हैं।
महिलाएं न खाएं ये चीजें
गर्भावास्था के चौथे महीने के बाद में बच्चा तेजी से गर्भ में पल रहा होता है। इस दौरान ही कुछ कारणों से क्रोमोजोम नंबर में या क्रोमोसोम की आकृतियों में परिवर्तन हो जाता है जिसके कारण किन्नर पैदा हो जाते है। ऐसा होने के कई कारण होते हैं। अगर गर्भावस्था के शुरूआती तीन महीने में गर्भवती महिला को बुखार आए और उसने गलती से कोई हेवी डोज़ दवा खाई हो तो ऐसा हो सकता है। गर्भवती महिला ने कोई ऐसी दवा या चीज का सेवन किया हो जिससे शिशु को नुकसान हो सकता हो या फिर गर्भावस्था में महिला ने विषाक्त खाद्य पदार्थ जैसे कोई केमिकली ट्रीटेड या पेस्टिसाइड्स वाले फ्रूट-वेजिटेबल्स खाएं लिए हों। इसलिए ध्यान रखें कि कभी भी गर्भावस्था के दौरान कभी भी दवाइंयों को खाने से बचें।
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