EC के बैन के बाद 'कर्फ्यू वाली माता मंदिर' क्यों गईं साध्वी प्रज्ञा
भोपाल। विवादित बयान को लेकर चुनाव आयोग के 72 घंटे के बैन के बाद भोपाल लोकसभा सीट से भाजपा प्रत्याशी साध्वी प्रज्ञा ठाकुर 'मौन' तो हैं लेकिन सियासत करने का कोई भी मौका नहीं छोड़ रही हैं। यही कारण है कि वे गुरुवार की सुबह भोपाल की प्रमुख मंदिर 'कर्फ्यू वाली माता मंदिर' पहुंचीं। यहां पर उन्होंने पूजा- अर्चना की और भजन-कीर्तन में भी शामिल हुईं।
ऐसे में सवाल उठता है कि चुनाव आयोग के 72 घंटे के बैन के बाद साध्वी प्रज्ञा 'कर्फ्यू वाली माता मंदिर' ही पहले क्यों पहुंची? क्या साध्वी इस मंदिर में पूजा करने के बहाने सियासत कर रही हैं और वोटर्स को साध रहीं हैं? आखिर क्या है साध्वी के इस मंदिर में जाने की सियासत?
मंदिर के स्थापना में विवाद
जैसा कि इस मंदिर का नाम है 'कर्फ्यू वाली माता का मंदिर', तो जाहिर है नाम से ही लग रहा है कि इस मंदिर के स्थापना में विवाद हुआ था। दरअसल, मातारानी की प्रतिमा स्थापना को लेकर 1982 में विवाद हुआ था। विवाद इतना बढ़ा कि यहां प्रशासन को कर्फ्यू लगाना पड़ा था। एक महीने तक यहां कर्फ्यू लगा रहा, उसके बाद यहां प्रतिमा की स्थापना हुई और मंदिर का निर्माण हुआ, तब से इस मंदिर को 'कर्फ्यू वाली माता का मंदिर' के नाम से जाना जाता है।
पुरानी भोपाल में है मंदिर
यह मंदिर भवानी चौक सोमवारा में पीर गेट के सामने यह मंदिर है। बताया जाता है कि इस इलाके में हिन्दू और मुस्लिमों की आबादी लगभग बराबर है। कहा जाता है कि इस प्रतिमा के स्थापना के समय पहली बार भोपाल में कर्फ्यू लगा था। इससे पहले धार्मिक विवाद को लेकर भोपाल में कभी भी कर्फ्यू नहीं लगा था। यही कारण है कि इस मंदिर का नाम ही 'कर्फ्यू वाली माता का मंदिर' पड़ गया और आज के तारीख में देशभर में यह मंदिर इसी नाम से जाना जाता है।
ध्रुवीकरण की सियासत
यही कारण है कि साध्वी प्रज्ञा ठाकुर चुनाव आयोग के 72 घंटे के बैन के बाद 'कर्फ्यू वाली माता का मंदिर' पहुंच गई औच यहां पर उन्होंने सुंदर कांड का पाठ करवाया और भजन-कीर्तन में भी शिरकत की। यानि की साध्वी प्रचार तो नहीं करेंगी लेकिन मंदिर-मंदिर घुमकर पूजा के बहाने अपने ऐजेंडे पर काम करती रहेंगी।
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