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इन तीन आईपीएस में से कोई एक बनेगा मध्यप्रदेश का डीजीपी

भोपाल. मध्यप्रदेश के डीजीपी पद के लिए बुधवार को दिल्ली में संघ लोक सेवा आयोग ने तीन नामों का पैनल बनाकर राज्य सरकार को सौंप दिया है। अब इस पैनल पर अंतिम निर्णय मुख्यमंत्री कमलनाथ को करना है। पैनल तैयार करने वालों में मध्यप्रदेश के मुख्य सचिव एसआर मोहंती भी शामिल थे। यूपीएससी ने जिन तीन नामों का पैनल बनाया है उनमें 1984 बैच के सबसे सीनियर आईपीएस वीके सिंह, वीके जौहरी और मैथलीशरण गुप्त का नाम शामिल है। इसके बाद मुख्यमंत्री कमलनाथ निर्णय करेंगे कि तीनों में से किसे डीजीपी नियुक्त किया जाए। इसमें सबसे सीनियर होने के कारण वीके सिंह को नियुक्ति मिलने की संभावना है। वर्तमान में भी वीके सिंह ही यह जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।
दरअसल, उत्तर प्रदेश के डीजीपी प्रकाशचंद्र के केस के बाद सुप्रीम कोर्ट ने यह गाइडलाइन दी है कि डीजीपी की स्थायी नियुक्ति के लिए यूपीएससी ही डीपीसी करके तीन नाम का पैनल राज्य सरकार को देगी। इसी के तहत पहली बार मध्यप्रदेश के डीजीपी के लिए यह डीपीसी हुई है। इससे पहले मुख्यमंत्री को अस्थायी रूप से नियुक्ति का अधिकार रहेगा।

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- जौहरी का नाम बाद में जुड़ा
सूत्रों के मुताबिक डीपीसी में शुरू में वीके सिंह, मैथलीशरण गुप्त और राजेंद्र कुमार का नाम था। वजह ये कि जौहरी ने पूर्व में अपनी सहमति डीजीपी पद के लिए नहीं थी। इस पर यूपीएससी के सदस्यों ने जौहरी से फोन पर पूछा, जिसके बाद जौहरी ने सहमति दी तो लंच के बाद उनका नाम शामिल कर लिया गया। वीके सिंह के बाद जौहरी का नाम था, लेकिन उनकी सहमति न होने पर मैथलीशरण गुप्त के बाद चौथे नंबर पर वरिष्ठ संजय चौधरी का नाम आया। उन पर लोकायुक्त प्रकरण चल रहा है, इसलिए उनका नाम बाहर हो गया। पांचवें नंबर के वरिष्ठ अशोक दोहरे भी सीआर में गड़बड़ होने के कारण सूची से बाहर हो गए। वरिष्ठता में छठवें नंबर पर राजेंद्र कुमार थे, लेकिन चौधरी व दोहरे के नाम बाहर होने से उनका नाम शामिल कर लिया गया। बाद में जौहरी की सहमति मिलने पर राजेंद्र भी बाहर हो गए।

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