IFS अफसरों को बचाने पौधरोपण की 6वीं बार जांच कराएगा वन विभाग - Web India Live

Breaking News

IFS अफसरों को बचाने पौधरोपण की 6वीं बार जांच कराएगा वन विभाग

भोपाल। आईएफएस अफसरों को बचाने के लिए वन विभाग अब पौध रोपण घोटाले की 6वीं बार जांच करवा रहा है। दरअसल, वन मंत्री उमंग सिंगार ने इस पूरे मामले में तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, तत्कालीन वन मंत्री गौरीशंकर शेजवार सहित वन मुख्यालय के अफसरों को दोषी मानते हुए इस मामले को ईओडब्ल्यू को सौंपने की अनुशंसा की थी।

पौध रोपण घोटाले में आईएफएस अफसरों को फंसते देख विभाग ने इस मामले की फाइल मुख्यमंत्री कमलनाथ को भेजी थी। उच्च स्तर पर चर्चा के बाद तय हुआ है कि इस मामले की सुक्ष्म स्तर पर जांच कराई जाए। इसमें प्रदेश की सभी नर्सरियों के पौधे तैयार करने की क्षमता की जांच भी कराई जाए जिससे ये पता चल सके कि उन्होंने जितने पौधे बेचना बताए हैं क्या वाकई सही हैं। इस बार च के लिए योजना एवं आर्थिक सांख्यकी विभाग को नोडल एजेंसी बनाया गया है। उल्लेखनीय है कि कांग्रेस ने सरकार में आते ही दो जुलाई 2017 को नर्मदा के किनारे रोपे गए पौध रोपण के घोटाले की बात कही थी।

योजना एवं आर्थिक सांख्यकी विभाग ने वन, कृषि, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, उद्यानिकी विभाग से सात बिंदुओं पर जानकारी मांगी है। विभाग ने पूछा है कि पौधे कहां से खरीदे गए थे। किस मूल्य पर पौधे खरीदे गए। पौधे प्रदाय करने वाले वन विभाग की नर्सरियों की क्षमता तथा उसमें पांच वर्षों तक तैयार किए गए पौधों की जानकारी मांगी है।

सांख्यकी विभाग ने यह भी पूछा है कि जिन क्षेत्रों में पौधे रोपे गए थे उसकी भौगोलिक स्थिति क्या है, उसके खसरा नम्बर तथा मैप भी उपलब्ध कराएं। साथ ही वर्तमान में पौधों के जीवितता की जानकारी एक सप्ताह के अंदर बुलाई गई है। विभागों द्वारा उपलब्ध कराई गई रिपोर्ट को वित्तमंत्री की अध्यक्षता में पौधरोपण की जांच के लिए मंत्री समूह समिति के समक्ष पेश की जाएगी।

पौधरोपण की जांच ईओडब्ल्यू से कराने का मामला ठंडे बस्ते में

वन मंत्री उमंग सिंघार ने पौधरोपण की जांच ईओडब्ल्यू से कराने की घोषणा 11 अक्टूबर २०१९ को की थी। पौधरोपण के दौरान हुई वित्तीय अनियमितताओं के संबंध नोटशीट और कुछ दस्तावेज भी मीडिया और सरकार को दिए थे। उन्होंने तत्कालीन भाजपा सरकार पर ये भी आरोप लगाए थे कि इसमें वन विभाग के अधिकारियों के साथ सरकार भी इस घोटाले में शामिल है। हालांकि कमलनाथ सरकार ने पौधरोपण की जांच कराने के संबंध में कोई निर्णय नहीं लिए हैं।


मंत्रि समिति ने मांगी जानकारी

पौधरोपण की जांच के लिए विधानसभा में गठित चार सदस्यीय मंत्री समूह समिति की बैठक 22 नवम्बर मंत्रालय में हो हुई थी। समिति की दूसरी बैठक 27 नवम्बर को होने वाली थी, जिसमें वन के अलावा सभी विभागों द्वारा रोपे गए पौधों की जीवितता की जानकारी देना था। विभागों से पौधरोपण की जानकारी नहीं आने से समिति की बैठक टाल दी गई है। पौधरोपण का मामला विधानसभा के अगले सत्र में भी उठ सकता है। इसी के चलते चार सदस्यीय मंत्री समूह ने सत्र से पहले पौधरोपण पर पहली बैठक उसकी पूरी जानकारी विभागों से बुलाई है।

इस तरह से कराई जांच

- अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने अगस्त २०१७ को याचिका दायर की कि 2 जुलाई को एक साथ रोपे गए सवा सात करोड़ पौधों की सुरक्षा के लिए कोई उपाय नहीं किए गए हैं। बारिश नहीं होने के कारण पेड़ सूख रहे हैं। इस संबंध में एनजीटी ने 25 सितम्बर तक सरकार से रिपोर्ट बुलाई। इसके लिए सरकार ने नोडल एजेंसी वन विभाग को बनाया था। वन विभाग ने एनजीटी में रिपोर्ट पेश करते हुए बताया कि 95 फीसदी पौधे जीवित हैं।

- दूसरे जांच, विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा सरकार के आखिरी विधानसभा सत्र के दौरान कांग्रेस ने सवाल उठाया था कि सरकार अपनी बाहबाही लूटने के चक्कर में बिना तैयारी के नर्मदा के किनारे सवा 6 करोड़ पौधे रोपे गए है, लेकिन हकीकत कुछ और ही है। पौधरोपण की जांच कराई जाए। वन विभाग ने विधानसभा को पेश किए गए आंकड़ों में बताया था कि 85 फीसदी पौधे जीवित हैं।

- तीसरी जांच, कांग्रेस सरकार के आने के बाद कराई गई। इस जांच रिपोर्ट में अधिकारियों ने बताया कि 80 फीसदी से अधिक पौधे जीवित हैं। बाद में पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने यह दवा किया उन्होंने पदयात्रा के दौरान खुद यह देखा है कि नर्मदा के किराने रोपे गए पौधे सूख गए हैं। कई जगह सिर्फ गड्ढे खोदे गए थे, पौधे नहीं लगाए गए। भाजपा सरकार ने पौधरोपण के फर्जी आंकड़े पेश किए हैं।

- चौथी जांच वन मंत्री उमंग सिंघार ने खुद कराई। जिसमें यह बात सामने आई कि करीब 75 फीसदी से अधिक पौधे जीवित हैं। इसके बाद वे खुद बैतूल सहित अन्य जिलों में औचक निरीक्षण कर देखा तो पाया मात्र 20 फीसदी ही पौधे जीवित पाए गए, जितने गड्ढे खोदे गए थे, उसमें से मात्र 15 फीसदी ही रोपे गए। इसके चलते उन्होंने पूरी रिपोर्ट को खरिज कर दिया।

- पांचवी जांच फिर मंत्री ने कराई। इसमें एक क्षेत्र के अधिकारी को दूसरे क्षेत्र में पौधरोपण के जांच की जिम्मेदारी दी गई, इसमें जांच में कुछ निजी एजेंसियों को भी शामिल किया गया था। हालांकि इस रिपोर्ट को उन्होंने बाहर नहीं किया। लेकिन इसी को आधार बनाते हुए उन्होंने पौधरोपण मामले की जांच ईओडब्ल्यू को देने की घोषणा की थी।



from Patrika : India's Leading Hindi News Portal https://ift.tt/2R1DEAe
via

No comments