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एक हजार रुपए महीना पाने 20 किलोमीटर का सफर

भोपाल। केस एक- पचास साल की गुलाब बाई विकलांग हैं। इन्हें हर माह एक हजार रुपए विधवा पेंशन योजना के तहत मिलते हैं। जिसे लेने के लिए के लिए छोला से कोहेफिजा तक जाना पड़ता है। छोला के आसपास किसी बैंक में ये खाता ट्रंासफर कराने का आवेदन दिया है लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।

केस दो- गैस राहत कॉलोनी करोद में रहने वाली फूल बाई भी उम्र के आखिरी पड़ाव पर हैं। इन्हें भी गैस राहत संचालनालय की योजना के तहत एक हजार रुपए मासिक पेंशन मिलती है लेकिन इसे लेने कोहेफिजा स्थित बैंक ऑफ इंडिया की ब्रांच जाना पड़ता है। आने जाने में करीब बीस किलोमीटर का सफर तय करना मजबूरी है।

इस तरह के एक दो नहीं बल्कि सैकड़ों मामले हैं। जहां मात्र 33 रुपए प्रतिदिन की पेंशन के महिलाओं को काफी परेशानी झेलनी पड़ रही है। ये स्थिति उस समय है जब हर योजना के तहत हितग्राही के खाते में सीधे पहुंचाए जा रहे हैं और एटीएम के जरिए कहीं से भी ये राशि निकालने के इंतजाम है।

भोपाल गैस त्रासदी में मारे गए लोगों के परिवारों को राहत देने विधवा पेंशन योजना की गई। इसके तहत करीब पांच हजार महिलाएं रजिस्टर्ड हैं। इन महिलाओं के लिए शहर में केवल दो बैंकों से पेंशन दी जाती है। इनमें पहला जुमेराती स्थित यूनियन बैंक है तो दूसरा कोहेफिजा स्थित बैंक ऑफ इंडिया। हर महीना एक हजार रुपए लेने महिलाओं को यहां जाना पड़ता है। महिलाओं के निवास स्थान के आसपास बैंकों की ब्रांच में इन खातों को ट्रांसफर करने की मांग की गई लेकिन इस पर विभाग कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है। ऐसे में बुजुर्ग महिलाएं परेशान हो रही हैंं।

 

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20 माह से अटके ढाई हजार महिलाओं के पांच करोड़

करीब ढाई हजार महिलाओं को 20 माह ये पेंशन नहीं मिली। अप्रेल 2016 से नवम्बर 2017 तक पेंशन रोक दी गई। इसके बाद पेंशन शुरू तो हो गई लेकिन इन बीस माह का बकाया अब तक नहीं दिया। ये करीब पांच करोड़ रुपए है।

महिलाओं के निवास के आसपास जो भी ब्रांच वहां इनके पेंशन खाते ट्रांसफर कराने को लेकर मांग है। वर्तमान में सभी महिलाओं को जुमेराती स्थित यूनियन बैंक की ब्रांच और कोहेफिजा स्थित बैंक ऑफ इंडिया की ब्रांच जाना पड़ता है। इस संबंध में गैस राहत विभाग को आवेदन दिए जा चुके हैं।

बालकृष्ण नामदेव, अध्यक्ष निराश्रित पेंशन भोगी मोर्चा



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