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प्रदेश के वन संरक्षित क्षेत्रों में बढ़े वन्य जीवों के शिकार के मामले

भोपाल। प्रदेश के संरक्षित वन क्षेत्रों में वन्य जीवों के शिकार के मामले दो साल में बढ़ गए हैं। इसमें सबसे ज्यादा शिकार बाघों, चीतल और सांभर के हुए हैं। इसको लेकर केन्द्र सरकार ने गस्ती बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। केन्द्र सरकार ने वन विभाग से संरक्षित क्षेत्रों में पिछले पांच साल अंदर वन्य जीवों के शिकार की जानकारी मांगी है। प्रदेश के वनों और वन्य जीवों की सुरक्षा के लिए एसीएफ और एसडीओ से लेकर वन रक्षक, वनपाल, उप वन क्षेत्र पाल वन क्षेत्र पाल करीब 22 हजार से अधिक सुरक्षाकर्मियों की फौज है।

इसके बाद भी संरक्षित और नेशनल पार्कों में वन्य प्राणियों के शिकार के मामले बढ़े हैं। वर्ष 2017 में जहां प्रदेश में वन्य प्राणियों के शिकार के मामले 18 हुए थे, लेकिन वर्ष 2018 में यह मामले बढ़कर 37 से अधिक हो गए हैं। इसको लेकर केन्द्र सरकार ने नेशनल पार्कों सहित अन्य संरक्षित क्षेत्रों में वन्य जीवों के सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने के लिए वन विभाग से कहा है। वहीं लोकसभा ने वन विभाग से पिछले पांच सालों में हुए वन्य जीवों के शिकार और वन अपराधों की जानकारी मांगी है।

 

बताया जाता है कि वन विभाग ने लोक सभी को पिछले चार सालों के वन अपराधों की जानकारी भेज दी है और वर्ष 2019 के वन अपराधों के आंकड़े नेशनल पार्क के डायरेक्टरों और डीएफओ से जानकारी बुलाई है।

अन्य वन अपराधों में कमी

वहीं प्रदेश के जंगलों में अतिक्रमण अवैध कटाई सहित अन्य वन अपराधों में कमी आई है। अवैध उत्खनन और खनिज परिवहन के मामले भी वन क्षेत्रों कम हुए हैं। वहीं वन विभाग वन्य जीव अपराधों को भी कम करने पर मंथन कर रहा है। वन विभाग वन्य जीव अपराध रोकने के लिए स्थानीय समितियों को सक्रिय करने के साथ ही वन अपराध में शामिल अपराधियों को रोजगार से जोडऩे का प्रयास कर रही है। इसके अलावा उन्हें स्थानीय समितियों के माध्यम से रोजगार भी दे रही है।

 



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