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भवन अनुज्ञा: ऑटोमेटेड बिल्डिंग अप्रूवल सिस्टम ने दो महीने में एक फाइल की मंजूरी

भोपाल. नगर निगम का ऑटोमेटेड बिल्डिंग अप्रूवल सिस्टम भवन अनुज्ञा की फाइलें मंजूर नहीं कर पा रहा है। स्थिति ये है कि मकान बनाने के लिए शहरवासी नगर निगम के ऑनलाइन सिस्टम पर आवेदन कर रहे हैं, पर मंजूरी नहीं मिल रही। दो महीने से एक भी आवेदन को मंजूरी नहीं दी गई। ऐसे में भवन अनुज्ञा व्यवस्था फिलहाल पंजीकृत आर्किटेक्ट व स्ट्रक्चरल इंजीनियर्स के भरोसे है। मालूम हो कि प्रतिमाह भवन निर्माण मंजूरी के लिए औसतन डेढ़ सौ से अधिक आवेदन आते हैं। सिस्टम दुरुस्त नहीं होने से लोगों को घर का सपना साकार करने में लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। दरअसल, ऑटोमेटेड बिल्डिंग अप्रूवल सिस्टम का जिम्मा संभालने वाली कंपनी का कार्यकाल दो महीने पहले खत्म हो गया। नई कंपनी ने जिम्मा संभाला, लेकिन सॉफ्टवेयर को जमीनी स्थितियों के अनुरूप अपडेट नहीं किया। नतीजतन भवन अनुज्ञा आवेदन मंजूरी की प्रक्रिया की ओर नहीं बढ़ पा रहे हैं।

पूरे प्रदेश में लागू किया था ये सिस्टम
एक अक्टूबर से ऑनलाइन बिल्डिंग परमिशन सिस्टम तमाम तरह की खामियों से जूझ रहा है। गौरतलब है कि ऑटोमेटेड बिल्डिंग परमिशन सिस्टम (एबीपीएस) भाग- दो के नाम से पूरे प्रदेश में लागू किया गया है। सिस्टम में इस तरह की परेशानी सभी जगह आ रही हैं। इससे आम लोग समेत आर्किटेक्ट और स्ट्रक्चरल इंजीनियर तक परेशान हैं। इस सिस्टम को लागू करते समय दावा किया गया था कि इस मिनट में फाइल का स्टेटस तय हो जाएगा। इसके उलट वर्तमान में लोगों को दो महीने तक ये पता नहीं चल रहा है कि उनके आवेदन की क्या स्थिति है?

दो महीने में एक फाइल हो सकी मंजूर

राजधानी में अक्टूबर महीने में 50 तो नवंबर में अब तक 18 भवन अनुज्ञा फाइल जमा हुईं। इनमें से महज एक को ही मंजूरी मिली है। बाकी के लिए इंतजार जारी है। इंदौर में अक्टूबर-नवंबर में 452 फाइलें जमा की गईं, पर मंजूरी दस को मिली। यही स्थिति ग्वालियर की है। यहां नवंबर महीने में 21 फाइलें जमा हुईं, पर मंजूरी किसी को नहीं मिली। जबलपुर में 27 फाइलों पर भी यही स्थिति रही। प्रदेश के अन्य शहरों की स्थिति भी कमोबेश ऐसी ही है।

इसलिए जरूरी ऑनलाइन परमिशन
भवन अनुज्ञा के लिए ऑटोमेटिक बिल्डिंग अप्रूवल सिस्टम के साथ दो साल पहले आर्किटेक्ट-स्ट्रक्चरल इंजीनियर्स के माध्यम से ऑनलाइन मंजूरी की व्यवस्था की गई थी। टाउन एंड कंट्री प्लानिंग से मंजूर इस ले-आउट पर आर्किटेक्ट अनुमति दे सकता है। जो ले-आउट मंजूर नहीं है, उसके लिए एबीपीएस सिस्टम से मंजूरी लेना जरूरी है।

ये हो रहा नुकसान

आर्किटेक्ट-स्ट्रक्चरल इंजीनियर्स के लिए सेप सॉफ्टवेयर है, जिसमें वे आवेदन जमा करते हैं। फिलहाल ये फाइल की हार्ड कॉपी लेकर इंजीनियर-आर्किटेक्ट भवन अनुज्ञा जाते हैं। जांच के बाद वे खुद ही मंजूरी दे देते हैं। ऐसे में सही अनुमति की उम्मीद नहीं की जा सकती। इनकी अनुमति लगभग मेनुअली हो रही है। दूसरी ओर एबीपीएस सिस्टम के ऑनलाइन होने से छह जगह चेकिंग प्वॉइंट की व्यवस्था है, इससे बिल्डिंग परमिशन में गड़बड़ी की आशंका कम रहती है।

नए सिस्टम में दावा किया गया था कि फाइलें इस मिनट में चेक हो जाएंगी। मेरी फाइलों को कई दिन हो गए हैं। अब तक जांच नहीं हो पाई।

अब्दुल मजीद, अध्यक्ष, मप्र स्ट्रक्चरल इंजीनियर एसोसिएशन

सिस्टम में आई परेशानियों को दिखवा रहे हैं। सिस्टम धीरे-धीरे रफ्तार पकड़ेगा। जल्द ही बिल्डिंग परमिशन पहले की तरह समय पर मिलने लगेंगी।
एसएस राठौर, चीफ सिटी प्लानर, भोपाल



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