हॉकर कॉर्नर नहीं बन सके, सड़कों पर हुआ गुमठियों का कब्जा
भोपाल. नगर निगम ने सड़कों और चौराहों/तिराहों से ठेल और गुमठियों का जमघट खत्म करने के लिए सभी वार्डों में हॉकर कॉर्नर बनाने की घोषणा की थी। सभी 85 वार्ड में हॉकर बनाने के लिए कहा गया था। ये हॉकर कॉर्नर पार्षद के माध्यम से बनाए जाने थे, जिसके लिए 10-10 लाख रुपए स्वीकृत किए गए थे।
महज कुछ स्थानों पर ही हॉकर कॉर्नर बन सके। बाकी वार्ड में ठेकेदारों ने काम ही नहीं किया। इसका परिणाम यह हुआ कि ठेल और गुमठी वालों की भीड़ बाजारों, सड़कों और चौराहों/तिराहों पर बढ़ गई। इससे आवागमन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। गंदगी भी फैल रही है, जिससे शहर की छवि खराब हो रही है।
उल्लेखनीय है कि शहर के सभी वार्ड में हॉकर कॉर्नर बनाने के लिए कहा गया था। ये हॉकर कॉर्नर स्थानीय पार्षद के माध्यम से दस-दस लाख रुपए की लागत से वर्ष 2018 में ही बनाए जाने थे। वार्ड 66, 46, 45, 48, 26 समेत कुछ ही वार्ड में हॉकर कॉर्नर बन सके हैं। शेष वार्ड में हॉकर कॉर्नर बनाए ही नहीं जा सके। इसका असर यह रहा कि पूरे शहर में सड़क किनारे ठेल व गुमठियों की संख्या लगभग 40 हजार से अधिक हो रही है।
एमपी नगर, कोलार और बैरागढ़ क्षेत्र में ही तीन हजार से अधिक अवैध गुमठियां और हाथ ठेले हैं। इनसे निगम को हर माह करीब 15 लाख रुपए के राजस्व की चपत भी लग रही है। इस स्थिति में नेताओं व अफ सरों का गठजोड़ भी सामने आ रहा है। हॉकर्स कॉर्नर की नई नीति में भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों, मुख्य मार्गों, स्कूलों और अस्पतालों के साथ सरकारी दफ्तरों के 100 मीटर के दायरे में गुमटियां और ठेले नहीं लगाने का प्रावधान है। स्थानीय नेताओं की शह पर हर कहीं अवैध गुमटी बाजार विकसित हो गए हैं। गुमठी माफियाओं की हकीकत 1100 क्वार्टर हनुमान मंदिर से लगी रोड के फुटपाथ पर लगी दुकानों, शाहपुरा तालाब किनारे, 12 नंबर साईं बोर्ड क्षेत्र में लगी गुमठियों से ही समझ सकते हैं।
अकेले कोलार और बैरागढ़ क्षेत्र में ही दो हजार से अधिक अवैध गुमठियां और हाथ ठेले हैं, जिनसे निगम को हर माह करीब 10 लाख रुपए की चपत लग रही है। नगर निगम के कर्मचारी शहर की अवैध गुमटियों और ठेलों से 20 रुपए की रशीद काट कर पैसे वसूलते हैं। सूत्रों की मानें तो यह रकम निगम के खाते में जमा नहीं की जाती है।
इस तरह करोड़ों रुपए की अवैध वसूली कर अवैध ठेल और गुमठियों को बढ़ावा दिया जा रहा है। सूत्र तो यह भी बताते हैं कि नगर निगम की सीमा में गुमटी रखवाने पर स्थानीय नेता दो से तीन लाख रुपए तक ऐठतें हैं। इसमें इनके दलाल और गुमठी माफिया सक्रिय रहते हैं। इन स्थानों पर अपराधी तत्वों का जमावड़ा भी रहता है। वाहनों को निकालने में परेशानी होती है और जरा सा वाहन टच होने पर विवाद व मारपीट की स्थिति बन जाती है।
सभी वार्ड में दस-दस लाख रुपए की लागत से हॉकर कॉर्नर बनाने का प्रस्ताव स्वीकृत हो चुका था। जगह चिन्हित कर ठेकेदारों को काम भी सौंप दिया गया था, लेकिन अधिकारियों और ठेकेदारों की मिलीभगत के चलते काम नहीं किया गया। काम नहीं करने वाले ठेकेदारों के खिलाफ नगर निगम ने ब्लैक लिस्ट करने की कार्रवाई भी नहीं की।
- रवीन्द्र यति, महासचिव, भाजपा पार्षद दल, नगर निगम
कुछ स्थानों पर हॉकर कॉर्नर बनाए जा चुके हैं। कुछ वार्ड में हॉकर कॉर्नर बनने में समस्याएं आ रही हैं, जिनका निराकरण कराया जा रहा है।
- हरीश गुप्ता, उपायुक्त, नगर निगम
from Patrika : India's Leading Hindi News Portal https://ift.tt/2qZ9QK9
via
No comments