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कुछ अस्पतालों की कारगुजारियों से पूरा कुनबा बदनाम, कहीं आधा कमरा-पूरा चार्ज, तो कहीं 12 घंटे का 1 दिन

भोपाल/ मध्य प्रदेश में जहां एक तरफ कोरोना वायरस तेजी से अपने पाव पसार रहा है, तो वहीं महामारी की विभीषिका में इंसानियत मानों मर ही गई है। हालात ये हैं कि, मरीजों की बीमारी से कम और अस्पतालों के रुपये खींचने के नए नियमों और बिलों को देखकर सांसे ऊपर नीचे हो रही हैं। संक्रमण बढ़ने के साथ ही, मध्य प्रदेश के कई निजी अस्पतालों ने एक बार फिर आपदा में अवसर तलाशना शुरु कर दिया है। जरूरत से ज्यादा मरीजों के आने की वजह से बेडों की मारामारी मची है। ऐसी स्थिति में भर्ती मरीजों को इलाज के एवज में लाखों रुपये तक के बिल थमाए जा रहे हैं।

 

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पत्रिका की पड़ताल में खुलासा

इस बात का खुलासा हुआ है पत्रिका की पड़ताल में...। भोपाल में निजी अस्पताल के एक कमरे में दो-दो मरीज रख रखे हैं। गर करने वाली बात ये है कि, दोनो ही मरीजों से कमरे का पूरा पूरा चार्ज वसूला जा रहा है। वहीं, प्रदेश की आर्थिक नगरी इंदौर में अकसर निजी अस्पतालों में 12 घंटे को एक दिन गिना जा रहा है। ये बात तो हम सभी जानते हैं कि, प्रदेश के इन्ही दोनों शहरों में कोरोना के सबसे अधिक मामले सामने आ रहे हैं।

 

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सीएम के निर्देश बेअसर

इंदौर में सितंबर माह में मरीज बढ़ने के दौरान अस्पतालों की मनमर्जी रोकने के लिये प्रशासन ने सभी अस्पतालों के लिये गाइडलाइन जारी की थी। इसमें प्रावधान किया गया था कि, अस्पताल संचालकों को कोविड इलाज की दरें बोर्ड पर प्रदर्शित करनी होंगी, पर अब तक कहीं भी ऐसा नहीं हो रहा। सीएम शिवराज खुद भी इसे लेकर निर्देश दे चुके हैं।

 

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अधिकारियों के रटे रटाए बयान फिर सुन लीजिए

भोपाल के सीएमएचओ डॉ. प्रभाकर तिवारी ने बताया कि, कोरोना के इलाज और जांच के लिये सरकार ने दरें तय की हैं। कोई लैब या अस्पताल ज्यादा पैसा ले रहा है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई करेंगे।


वहीं, इंदौर सीएमएचओ डॉ. बीएस सैत्या का कहना है कि, अस्पतालों को पत्र भेजकर उपचार शुल्क की जानकारी मांगी है। अस्पताल द्वारा बताए गए शुल्क की समीक्षा करने के बाद उन्हें अस्पतालों के रिसेप्शन पर लगे बोर्ड पर चस्पा करवाया जाएगा।

 

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