शाहपुरा तालाब के पास 60 लाख रुपए खर्च कर डेढ़ साल पहले बनाई स्लैब धंसी, दुर्घटना की आशंका
भोपाल। शाहपुरा तालाब किनारे का स्लैब व ब्लॉक्स धंस गए हैं। डेढ़ साल पहले ही तालाब सौंदर्यीकरण के नाम पर इन्हें बनाया गया था। इसमें करीब साठ लाख रुपए का बड़ा खर्च हुआ था। स्लैब व ब्लॉक धंसने से यहां दुर्घटना की आशंका बन गई है। यहां रोजाना शाम को ऋषभदेव उद्यान में आने जाने वालों की बड़ी संख्या रहती है। इसके साथ ही शाहपुरा तालाब किनारे चौपाटी लगती है और शाम से रात तक बड़ी संख्या में लोगों को जमावड़ा यहां रहता है। धंसी स्लैब और ब्लॉक से यहां बड़ी दुर्घटना की आशंका बन रही है। झील संरक्षण के अपर आयुक्त पवनकुमार सिंह है और उन्हें इसकी पहले शिकायत की जा चुकी है, लेकिन ध्यान नहीं दिया गया। अब भी वे सिर्फ इसे दिखाने का कह रहे हैं।
गौरतलब है कि शाहपुरा तालाब शहर का तीसरा बड़ा तालाब है। इसे एक सीवेज पोंड की तरह तैयार किया गया था। यहां ट्रीटेड पानी आता था और ये नहर के माध्यम से आगे खेती- किसानी के लिए निकल जाया करता था। बीते सालों में तालाब की सुध नहीं ली गई। यहां राशि तो खर्च कर, लेकिन सिर्फ दिखावटीतौर पर। इस समय तालाब लगभग पूरी तरह गाद से भर गया है। बेहद उथला हो गया है। यहां आए दिन बड़ी संख्या में मछलियां मरती हैं। इसमें अब त्रिलंगा से लेकर गुलमोहर, पंचशील से एकांत पार्क में आने वाला नाला सीधा मिल रहा है। इसके आसपास पर्यटन संबंधी गतिविधियां विकसित की जा रही है, लेकिन तालाब के पानी की बदबू लोगों की दिक्कत बढ़ाती है। अब इसके किनारे की स्लैब धंसने से परेशानी बढ़ रही है।
कई क्षेत्रों में सडक़ें खुदी
शहर में पानी और सीवेज लाइन के लिए करीब 400 किमी की लाइनें बिछाई गई। इसमें से अभी 100 किमी की लाइनें बिछाना बाकी है। अभी रेस्टोरेशन का काम 50 फीसदी ही हुआ। ये करबी 200 किमी के लगभग है। पानी और सीवेज काम अमृत प्रोजेक्ट के तहत हुआ है। इसमें करीब 300 करोड़ रुपए का बड़ा खर्च हुआ है। कोलार से लेकर गुलमोहर, बावडिय़ा कला, शाहपुरा, मैनिट क्षेत्र, नेहरू नगर, होशंगाबाद रोड मिसरोद और अन्य संबंधित क्षेत्रों में काम हुआ। पानी की लाइन के लिए 200 किमी की अतिरिक्त खुदाई हुई। ये निगम में शामिल नए क्षेत्रों में किया गया। इसका रेस्टोरेशन भी 40 फीसदी से अधिक बाकी है। बैरसिया रोड, पोलीटेक्रिक कॉलेज, नादरा बस स्टैंड, हमीदिया व इससे जुड़े क्षेत्रों में भी खुदाई हुई। अप्रैल 2020 तक ही सभी काम पूरे होने थे। इसे बढ़ाकर दिसंबर 2021 तय किया था, अब फिर लगातार समय सीमा बढ़ाई जा रही, लेकिन काम पूरा नहीं हुआ। कोलार की समानांतर लाइन बिछाने का काम तक पूरा नहीं हुआ। ये करीब डेढ़ साल पीछे चल रही है।
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