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गांवों को बचाने डैम पर लगेंगे चेनल गेट

रायसेन/सलामतपुर. 1976 में बने हलाली डैम के रखरखाव और गेट के पास जलसंग्रहण क्षमता बढ़ाने के लिए गहरीकरण सहित, नहरों की मरम्मत सहित सड़क निर्माण आदि कार्यों के लिए योजना बनाई गई है। डैम बनने के बाद से इसके रखरखाव के लिए संभव: पहली बार कोई योजना बनाई गई है। रविवार को जलसंसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट ने हलाली डैम पहुंचकर निरीक्षण किया। उन्होंने स्वास्थ मंत्री और क्षेत्रीय विधायक डॉ. प्रभुराम चौधरी के साथ

बोट से डैम का भ्रमण किया


सिलवाट ने बताया कि 40 हजार हैक्टेयर में बने इस डैम से रायसेन, विदिशा और भोपाल जिले के लगभग 12 हजार किसान लाभान्वित होते हैं। डैम की नहरों से खेतों तक पानी पहुंचता है, वहीं रायसेन और विदिशा शहर के लिए पेयजल इस डैम से जाता है। इसलिए डैम का निरीक्षण कर इसके रखरखाव के जरूरी कार्य कराने के निर्देश अधिकारियों को दिए हैं। इसके लिए 19 करोड़ रुपए स्वीकृत किए हैं। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि आप डैम से जुड़े किसानों से संवाद करें और जानें कि उन्हें समय पर पानी मिलता है या नहीं, उन्होंने नहरों का रखरखाव समय पर करने के साथ डैम पर बने पुल की बाउंड्री वॉल बनाने के निर्देश दिए। इस मौके पर कलेक्टर उमाशंकर भार्गव, एसडीएम एलके खरे सहित विभागीय अधिकारी मौजूद थे।

गांवों को डूब से बचाने 24 करोड़ की योजना


बारिश के दिनों में हलाली डैम के पिछले हिस्से में बसे गांवों में जलभराव की स्थिति बनती है। इसे नियंत्रत करने के लिए डैम के ओवरफ्लो को नीचा करने की योजना बनाई गई है। इसमें ओवरफ्लो के नीचे की चट्टान को तोड़कर चेनल गेट लगाया जाएगा, ताकि गांवों में जलभराव होने से पहले तालाब का पानी ओवरफ्लो से निकल सके। इसमें गेट की गहराई 20 फीट तक बढ़ेगी। इस कार्ययोजना पर अधिकारियों को एक बार रिव्यु करने के लिए कहा गया है, ताकि कमियों को दूर कर टेंडर जारी किए जा सकें।

  • मंत्री ने ये निर्देश दिए
    स्थानीय नगरीय निकायों को पीने का पानी दिया जा रहा है। इसकी संबंधित निकायों से बकाया राशि वसूल की जाए। रायसेन नपा से 88 लाख तथा विदिशा नपा से 72 लाख लेना है।
    15 दिन में एक बार हलाली डैम के अधिकारी रायसेन में बैठें और इसकी सूचना दें, ताकि किसान अपनी समस्याएं बता सकें।
    डैम से सिंचाई, पेयजल आदि किसी भी कार्य के लिए निर्णय से पहले विधायक, सांसद और किसानों के साथ हर हाल में बैठक करें।
    हलाली सहित अन्य डैमों के कैचमेंट क्षेत्र और नहरों के किनारे पौधरोपण करें।
    मत्स्य पालकों को क्रेडिट कार्ड उपलब्ध कराया जाए।
    महुआखेड़ा और पास गांव में भी पानी पहुंचाने के लिए पाइप लाइन बढ़ाई जाए।
    गडरा खेड़ी गांव के लोगों की सुविधा के लिए भी पुलिया बनाई जाए।


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